रानीगंज : इसीएल के कुनुस्टोरिया एरिया अंतर्गत नारायणकुड़ी पैच के नजदीक इसीएल द्वारा की जा रही मिट्टी की कटाई का कार्य रोक आसपास के गांव की महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया. महिलाओं ने नारायणकुड़ी ओसीपी के कोयला उत्पादन का कार्य भी रोक दिया. उनकी शिकायत है कि ओसीपी में निरंतर ब्लास्टिंग होने से नूतन एगरा इलाके सिंह पाड़ा, उत्तरपाड़ा, मोचीपाड़ा, गोराईपाड़ा के कई घरों में दरारें उभर आयी हैं. इलाके के कई कुओं का जलस्तर काफी नीचे चला गया है.
कई पोखरों का पानी सूख गया है. ट्यूबवेल से भी पानी आना बंद हो गया है. गांव की सीता देवी, गीता बाउरी, मीना बाउरी, सुनीता देवी ने बताया कि ओसीपी निर्माण से कइयों को नौकरी तो मिली है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा लोगों को नुकसान भी हुआ है. पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ रहा है. पानी के लिये हाहाकार मचा है. घर के सदस्यों को दूरदराज के इलाकों से पीने का पानी लेकर आना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में 13 बीघा का सबसे बड़ा पोखर है.
उसका उसका जलस्तर भी काफी नीचे हो गया है. उस पोखर में कई इलाके के लोग कपड़ा धोने, नहाने आते हैं. पोखर में पानी घटने से जनजीवन बेहाल हो गया है. बाध्य होकर आज ओसीपी की जमीन पर मिट्टी कटाई के कार्य को रोक दिया है.
खबर पाकर कोलियरी एजेंट ओमप्रकाश यादव ने नारायणकुड़ी में पहुंचकर महिलाओं को समझाने का प्रयास किया. लेकिन महिलाएं अपनी मांगों पर अडिग रही. ओमप्रकाश यादव ने बताया कि इसीएल के खान सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मिट्टी कटाई एवं ओसीपी क्षेत्र का रिसर्च करके ही इसीएल को वहां ब्लास्टिंग करने की अनुमति दी है.
उन्होंने बताया कि ब्लास्टिंग से किसी प्रकार का नुकसान आसपास के इलाके में नहीं होगा. इलाके में पानी की समस्या कोई नयी नहीं है. चंद लोगों के बहकावे में आकर महिलाओं ने आज इसीएल का काम रोक दिया.
