अनदेखी समस्याओं से जूझ रहा नागरकाटा का आदर्श गांव

नागराकाटा : कभी जंगली हाथियों का डर तो कभी तेंदुए का. आतंक से रात को चैन से सो भी नहीं पाते हैं. हल्कि बारिश में ही पूरा गांव पानी में डूब जाता है. बनने के तीन साल बाद भी गांव में बिजली नहीं पहुंची. सोलर लाइट एकमात्र भरोसा है. वह भी खराब होने लगी है. […]

नागराकाटा : कभी जंगली हाथियों का डर तो कभी तेंदुए का. आतंक से रात को चैन से सो भी नहीं पाते हैं. हल्कि बारिश में ही पूरा गांव पानी में डूब जाता है. बनने के तीन साल बाद भी गांव में बिजली नहीं पहुंची. सोलर लाइट एकमात्र भरोसा है. वह भी खराब होने लगी है. शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है. सड़क भी आधी ही बनी है. इस स्थिति में लोग वहां बसने को तैयार नहीं. इससे लगभग 200 घरों में ताला बंद है. यह दुर्दशा नागराकाटा के दूर दराज बामनडांगा चाय बागान स्थित आदर्श गांव की है.
बामनडांगा चाय बागान के खाली जमीन पर 2015 में कार्तिक उरांव व बिरसा मुंडा के नाम पर आदर्श गांव का उद्घाटन किया गया था. यहां बागान के 571 भूमिहीन परिवारों को ढाई कट्ठा जमीन का पट्टा देकर गीतांजली योजना के तहत घर व शौचालय का निर्माण कराया गया था. प्रत्येक घरों के सामने एक-एक सोलर लाइट लगाया गया. लेकिन तीन सालों में लगभग सभी लाइटें खराब हो गयी. गोरुमारा जंगल के समीप इस आदर्श गांव में लगभग हर रात जंगली हाथियों का आक्रमण होता है.
हाथियों ने अबतक यहां के छह मकानों को तोड़ दिया है. घरों में रसोई नहीं है. इससे आंगन में ही खाना बनाना पड़ता है. ज्यादातर घरों का शौचालय टूट फूट गया है. जिससे निवासियों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है. पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. कुछ ट्यूबवेल लगाये गये हैं. लेकिन यह घरों से यह काफी दूर है. यहां जल निकासी की व्यवस्था भी समुचित नहीं है. हल्कि बारिश से ही इलाके के घरों में पानी घुस जाता है. उस दौरान पंचायत से मिला चूड़ा-गुड़ ही एकमात्र भरोसा होता है.
समस्या की बात को तृणमूल के नागराकाटा ब्लॉक कमेटी के अध्यक्ष अमरनाथ झा ने बताया कि इलाके में बिजली के लिए बिजली विभाग से बातचीत की गयी है. जल्द ही समस्या का समाधान हो जायेगा. विधायक शुक्रा मुंडा ने कहा कि समस्याओं के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत करवाया जायेगा.

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