सांकतोडिया : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) तथा उसकी अमुषांगिक कोयला कंपनियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार विभिन्न खदानों के बंद होने से इनके श्रमिकों तथा कर्मचारियों का समायोजन अन्य खदानों में किया जा रहा है. इसके बाद भी रर्मियों की संख्या सरप्लस है. कंपनी में कितने कर्मियों को इस योजना में शामिल किया जायेगा, यह स्पष्ट नहीं है.
घाटे में चलने वाली खदानों को बंद करने की कवायद सीआइएल पिछले एक वर्ष से कर रहा है. पर श्रमिक नेताओं के विरोध के चलते इसे पूरी तरह लागू करने में दिक्कत आ रही है. प्रबंधन घाटे में चल रही कुछ खदानों को बंद करने में सफल रहा है. जिन खदानों से कम उत्पादन हो रहा है, उन खदानों को धीरे-धीरे बंद करने की कोशिश चल रही है.
इन खदानों में कार्यरत कर्मियों को अन्यत्न भेजा जा रहा है. इसके बाद भी कुछ स्थानों पर सरप्लस मैनपावर की स्थिति बनी हुई है. इस स्थिति से निपटने के लिए कोल प्रबंधन ने कर्मियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना लागू करने की कवायद शुरू कर दी है.
प्रबंधन की मंशा है कि कर्मी स्वेच्छा से वीआरएस लेते हुए कार्यमुक्त हो सकेंगे. इससे कर्मियों को फायदा मिलेगा. इसीएल में वीआरएस के लिए महाप्रबंधक भूमिगत, वित्त, आईईडी, सिस्टम तथा पीएंडआईआर को शामिल किया गया है.
महाप्रबंधक के स्तर से जारी सर्कुलर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कब तक आवेदन जमा करना होगा और कर्मियों को वीआरएस कब से प्रदान किया जायेगा. कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक कंपनी में लगभग 2.98 लाख कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं.
प्रतिमाह सेवानिवृत्ति होने पर कर्मचारियों की संख्या घटती जा रही है. बावजूद प्रबंधन वीआरएस लागू करने कोशिश में जुटा है. स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना के संबंध में एचएमएस के महामंत्नी नाथूलाल पांडेय ने कहा कि सीआइएल स्तर पर इस मुद्दे पर कई बार वार्ता हुई है, प्रबंधन ने समीक्षा करने कमेटी गठित करने का निर्णय लिया था, पर कमेटी का गठन नहीं हो सका है. कमेटी पहले समीक्षा करेगी, उसके बाद वीआरएस का मसौदा तैयार होगा.
