दुर्गापुर : गर्मी बढ़ने के साथ ही गरीबों का फ्रिज कहे जाने वाले घड़े और सुराही की बिक्र ी बढ़ गई है. इसमें जल न सिर्फ प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, बल्कि उसमें मिट्टी की सौंधी खुशबू भी घुली होती है. यही वजहहै कि घरों से लेकर कार्यस्थल में घड़े व सुराही अपना स्थान बनाये हुयी हैं.
ग्रामीण क्षेत्नों में 60 फीसदी से अधिक लोग ठंडे पानी के लिए फ्रिज के स्थान पर इनका उपयोग कर रहे हैं. गर्मी शुरू होने के साथ ही बाजार में घड़ा और सुराही की बिक्री बढ़ जाती है. ग्राहकों ने कहा कि फ्रिज का जल ठंडा तो होता है, लेकिन मिट्टी के घड़े का जल पीने से ही तृप्ति मिलती है. मिट्टी के इन बरतनों की कीमत में काफी उछाल आया है.
पिछले वर्ष जहां एक घड़ा की कीमत 20 रु पये से लेकर डेढ़ सौ रु पये तक थी तो इस वर्ष वह 50 रु पये से लेकर 220 रु पये तक में बिक रहा है. बिक्रेताओं ने कहा कि मिट्टी के घड़ों की मांग तीन गुणा बढ़ गयी है. घडा खरीदने आयी शांति देवी, किशन शर्मा आदि ने कहा कि गर्मी के दिनों में ठंडे पानी के लिए मिट्टी के घडे व सुराही ही सहारा हैं.
लागत को ले कर कुम्हार हैं परेशान : कुम्हार मिट्टी के बर्तनों पर आने वाली लागत को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण उन्हें भी घड़ों की कीमत में इजाफा करने को विवश होना पड़ रहा है. इस साल घड़ा और सुराही बनाने में लागत डेढ़ गुना बढ़ गई है. मजदूरी महंगी और बर्तनों को पकाने के लिए ईधन जुटाने में काफी खर्च हो रहे हैं.
