आसनसोल : गुरूवाणी मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले सिखों के प्रथम धर्म गुरू गुरूनानक देव के जीवन पर बनी फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ को सिखों की मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए खालसा सेंट्रल गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी सदस्यों ने सोमवार को जिलाशासक कार्यालय पर प्रदर्शन किया.
जिलाशासक की अनुपस्थिति में अतिरिक्त जिलाशासक आरिंदम राय को ज्ञापन सौंपा तथा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक की मांग की. इससे पहले कमेटी सदस्यों सह आसनसोल गुरूद्वारा, बर्नपुर गुरूद्वारा, बराकर गुरूद्वारा, दुर्गापुर गुरूद्वारा, पानागढ़ गुरूद्वारा, चित्तरंजन गुरूद्वारा के प्रतिनिधियों ने एचएलजी अस्पताल मैदान के निकट एकत्रित होकर जुलूस निकाला. बाद में शिष्टमंडल ने ज्ञापन सौंपा, जिसमें रूपनारायणपुर के चरनजीत सिंह, बर्नपुर के सरदार चरनजीत सिंह, पुरूलिया के सरदार मलकित सिंह, बराकर के सरदार सुरजीत सिंह तथा बर्नपुर के सरदार अवतार सिंह शामिल थे.
नेतृत्व कर रहे खालसा सेंट्रल गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी के राज्य अध्यक्ष हरपाल सिंह जोहल ने कहा कि फिल्म ‘नानक शाह फकीर’ में फिल्माये गये कई दृश्य आपत्तिजनक हैं. फिल्म में गुरूनानक साहब के जन्म स्थल को बनारस बताये जाने से भी सिख संप्रदाय के लोगों में खासी नाराजगी है. उन्होंने कहा कि गुरूनानक देव का जन्म लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था. उन्होंने कहा कि सिख संप्रदाय के लोगों की अपने धर्म और देश के प्रति गहरी आस्था और समर्पण है.
उन्होंने कहा कि फिल्म में धर्म गुरूओं को मानव चित्नों के जरिये दर्शाया गया है, जो सिख धर्म के खिलाफ है. इस दृश्य को एनिमेटेड दिखाया जा सकता था. उन्होंने फिल्म में भ्रामकता और त्नुटियों की भरमार बताते हुए इसके रिलीज पर रोक की मांग की है. बलवंत सिंह, राजू अहलूवालिया, रिंकू सलूजा, धदका रोड गुरूद्वारा के सचिव गुरूत्याम सिंह, दिलदार सिंह, बलकार सिंह, गुरूदेव सिंह, ऋषभ सिंह, बलवीर सिंह आदि उपस्थित थे.
सिख संगत की भावनाओं से खिलवौड़ मंजूर नहीं
फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग करते हुए विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों ने कहा कि इसका विरोध लगातार जारी रहेगा. सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. दुर्गापुर बेनाचिती गुरूद्वारा के अध्यक्ष गुरूदयाल सिंह ने कहा कि इस फिल्म से सिख कौम की भावनाएं आहत हुई हैं. यह सरासर सिखों की भावना के साथ खिलवाड़ है. बर्नपुर गुरूद्वारा के पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह ने कहा कि सिख धर्म गुरूओं के चरित्न का मानवीय किरदार में चित्नण धर्म विरूद्ध है. इसे रोका जाये. बराकर गुरूद्वारा के सुरजीत सिंह ने कहा कि फिल्म में गुरूनानक देव का जन्म स्थल बनारस बताया गया है. जबकि उनका जन्म लाहौर में हुआ था.
चित्तरंजन गुरूद्वारा के सरदार चरणजीत सिंह गौराया ने कहा कि फिल्म में सरासर गलत और काल्पनिक तथ्य दर्शाये गये हैं. इससे सिख कौम की भावनाएं आहत हुई हैं. किसी भी कीमत पर फिल्म को रिलीज होने नहीं देंगे. रानीगंज गुरूद्वारा के इंद्र सिंह ने कहा कि सिख धर्म में धर्म गुरूओं को नाटक, फिल्म के माध्यम से मानवीय किरदारों में नहीं दिखाया जा सकता है. यह धर्म का अपमान है. अंडाल गुरूद्वारा के सरदार यशवंत सिंह ने कहा कि सिख धर्म सिद्धांतों का सम्मान करता है. यह फिल्म धार्मिक मर्यादाओं के विरूद्ध बनी है. देश और दुनिया भर के सिख इसका हर स्तर से विरोध कर रहे हैं.
