आसनसोल. देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठान कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) में ‘थर्टी डे वर्क’ लागू करने का इंप्लीमेंटेशन इंस्ट्रक्शन गत नवंबर, 2017 में ही जारी किया गया था. प्रबंधन की माने तो अगले सप्ताह से कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक कोयला कंपनियों में इसे सख्ती से लागू करने की प्रबंधकीय तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.
माइंस एक्ट के तहत अब कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषांगिक कोयला कर्मचारियों तथा श्रमिकों को सप्ताह में 48 घंटे काम करना होगा. इसके लिए खदानों में अब 30 दिन काम होगा. प्रबंधन ने पहले ही इसके संकेत दे दिये थे. अब इसे लागू करने की बारी आ गयी है. ‘थर्टी डे ड्य़ूटी’ के आदेश के सुचारू क्रियान्वयन की दिशा में प्रबंधन कटिबद्ध है. कर्मियों के लिए अब रविवार को छुट्टी की जगह स्टेगर्ड रेस्ट चालू होगा. स्टेगर्ड रेस्ट के तहत अब कर्मचारियों तथा श्रमिकों के लिए सप्ताह में अवकाश का कोई एक दिन तय कर दिया जायेगा.
रेस्ट डे में अगर काम के लिए प्रबंधन बुलाता है तो कर्मियों को डबल हाजिरी मिलेगी. मौजूदा समय में रविवार के दिन काम करने से डबल हाजिरी तथा एक दिन रेस्ट मिलता है. अब प्रबंधन इसे पूरी तरह से बंद कर देगा. कोल इंडिया में 2.98 लाख स्थायी कर्मचारी तथा मजदूर कार्यरत हैं. इसमें करीब 1.95 लाख से दो लाख मजदूरों को सनडे ओटी आदि का लाभ मिलता था. संडे और ओवर टाइम डय़ूटी करने के लिए कर्मियों में होड़ मची रहती थी. नये आदेश के लागू होने के बाद ऐसा नहीं हो पायेगा. अनुमान लगाया गया है कि इस निर्णय के लागू होने से कंपनी प्रबंधन को दो हजार करोड़ रूपये की वार्षिक बचत होगी.
