आसनसोल. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को आसनसोल महकमा कार्यालय तथा कोर्ट परिसर रणक्षेत्न में तब्दील हो गया. सीआरपीसी की धारा 144 बेअसर हो गयी. स्थिति नियंत्रण के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. वकीलों के सरिस्ता में घुसकर एक मुवक्किल को उठाने का प्रयास करने पर अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से पुलिस अधिकारियों का विरोध किया.
कोर्ट परिसर में भगदड़ मच गयी. वकीलों ने महकमा शासक कार्यालय के समक्ष धरना दिया और उन्हें पुलिस के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. माकपा के जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने कहा कि उनके दो सौ से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन महकमा शासक कार्यालय के समक्ष ही तृणमूल संरक्षित अपराधियों ने फाड़ दिया. पुलिस मूकदर्शक बनी रही. तृणमूल के जिला अध्यक्ष वी शिवदासन (दासू) ने कहा कि इतिहास में ऐसा एक भी चुनाव नहीं हुआ है जो शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ हो. चुनाव में हंगामा होगा ही. इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टी को तैयार रहना होगा.
क्या हुआ कोर्ट परिसर में
सोमवार को महकमा शासक कार्यालय में प्रवेश के सभी सड़कों पर भारी संख्या में गुट बनाकर युवकों की तैनाती थी. इसमें महिलाओं की भागीदारी भी बढ़-चढ़ कर थी. ये लोग नामांकन जमा करने आये उम्मीदवारों का नामांकन पत्न छीनकर फाड़ रहे थे. विरोध करने वालों की पिटाई भी की जा रही थी. यह कार्य सुबह से ही जारी था. कुछ देर उपरांत इसका विरोध होने पर हंगामा आरंभ हो गया. पुलिस सक्रि य हो गयी. इसी बीच कोर्ट परिसर में अधिवक्ता असीम नायक के सरिस्ता में कुछ लोग दाखिल हो गये और वहां बैठे उनके मुवक्किल कन्यापुर निवासी बबन मिश्र को उठाकर ले जाने लगे. तत्काल सभी वकीलों ने इसका विरोध किया और मुवक्किल को उनके चंगुल से निकाला. इस घटना को लेकर कोर्ट में भगदड़ मच गयी. वकीलों ने आंदोलन शुरू कर दिया. आसनसोल बार एसोसिएशन के सचिव वाणी मंडल ने बताया कि वकील के सरिस्ता से इस प्रकार किसी को उठाकर ले जाना सही नहीं है. चारो तरफ आतंक का माहौल छाया था. जिसका विरोध करते हुए वकीलों ने महकमा शासक कार्यालय के समक्ष धरना दिया और ज्ञापन सौंपा.
144 धारा का उल्लंघन
महकमा शासक कार्यालय के दो सौ मीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 लागू थी. नामांकन पत्न जमा शुरू होने के कुछ देर बाद ही कोर्ट परिसर तक भीड़ पहुंच गयी. जगह जगह नामांकन जमा देने आये उम्मीदवारों के कागजात छीने जा रहे थे. कई चरणों मे रूक रूक कर हंगामा चलता रहा. हंगामा ज्यादा होने पर पुलिस ने क्लब के पास जमा भीड़ को हटाने के लिए लाठियां चलायी. कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया.
200 से अधिक नामांकन फाड़े
माकपा के जिला सचिव श्री चटर्जी ने बताया कि आसनसोल महकमा में सालानपुर प्रखण्ड इलाके में छह पंचायत समिति, 40 ग्राम पंचायत, बाराबनी प्रखण्ड में 15 पंचायत समिति, 35 ग्राम पंचायत, जामुड़िया प्रखण्ड में 17 पंचायत समिति, 40 ग्राम पंचायत, रानीगंज प्रखण्ड में छह पंचायत समिति, 40 ग्राम पंचायत और दुर्गापुर महकमा में जिला परिषद, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायत के कुल 200 नामांकन फॉर्म तृणमूल के अपराधियों ने सोमवार छीन कर महकमा शासक कार्यालय के समक्ष ही फाड़ दिए. मेयर और जिला परिषद के उपाध्यक्ष के नेतृत्व में यह कार्य दोनों महकमा कार्यालयों में हुआ. पुलिस मूकदर्शक बनी रही. बाराबनी में एक माकपा उम्मीदवार का अपहरण कर लिया गया. बाद में उसे मुक्त किया गया. तृणमूल के इस आतंक का जवाब जनता जरूर देगी.
लोकतंत्र की हुई हत्या
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देवेश चक्र बर्ती ने कहा कि 2018 का त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव राज्य के इतिहास का एक काला अध्याय रहा है. लोगों के गणतांत्रिक अधिकारों का यह हनन है. तृणमूल चुनाव से डर रही है इसलिए इस प्रकार का आतंक फैला रही है. नामांकन जमा करने आये उम्मीदवारों पर खुले आम हमला, उम्मीदवार के घर पर जाकर हमला, सभी के समक्ष नामांकन पत्न छीन कर फाड़ देना यह किसी भी राज्य में संभव नहीं है.
विरोधी शून्य का सपना साकार
पूर्व सांसद सह भाकपा के जिला सचिव आरसी सिंह ने कहा कि तृणमूल सुप्रीमो का नारा विरोधी शून्य करने का सपना साकार हो गया. इस प्रकार विरोधी शून्य किया जा सकता है, 50 साल के राजनैतिक जीवन मे यह पहला अनुभव है. विकास का मुद्दा चुनाव में है ही नही,ं चारों ओर आतंक का माहौल है. नामांकन पत्र जमा करने न देना ही तृणमूल की सबसे बड़ी हार है. लोगों को सरकार के कार्य का मूल्यांकन करने से बंचित होना पड़ा.
उम्मीदवार नहीं दे पाने के कारण बहाना
तृणमूल के जिला अध्यक्ष वी शिवदासन ने कहा कि तृणमूल ने पूरे राज्य में जिस तेजी से विकास कार्य किया है, उससे विपक्षी सारे दल बौखला गये हैं. उन्हें चुनाव में खड़ा होने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे है. ऐसे में वह तृणमूल के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा एक भी चुनाव दिखा दीजिये जिसमे थोडा बहुत हंगामा नहीं होता है. इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टियों को पहले से तैयार रहना होता है. जन समर्थन तृणमूल के अलावा किसी के पास नहीं है. वाममोर्चा के 34 वर्षों के शासन काल मे इससे बहुत ज्यादा हंगामा होता रहा है.
तृणमूल ने मनाया जश्न
नामांकन जमा करने की प्रक्रि या समाप्त होते ही तृणमूल कार्यकर्ताओं ने अपने सभी कर्मियों को हरे रंग का गुलाल लगाकर जीत का जश्न सोमवार को ही आसनसोल कोर्ट परिसर में मनाया.
