प्रक्रिया. मुथूट फाइनेंस डकैती कांड में तीनों आरोपी कोर्ट में पेश किये सीआईडी ने
आईपीसी की धारा 412 जोड़ने के साथ ही ली जायेंगी अंगुलियों की छाप
15 को पुन: इस मामले में होगी सुनवाई, सीआईडी से मांगा केस डायरी
आसनसोल : वित्तीय संस्थान मुथूट फाइनेन्स की आसनसोल शाखा में बीते 23 दिसंबर को हुयी डकैती कांड में गिरफ्तार शशांक कुमार सिंह, ठाकुर नवरंग कुमार सिंह और राजीब सिंह उर्फ पुल्लू सिंह की 14 दिन की सीआईडी रिमांड के दौरान उनकी निशानदेही पर सीआईडी ने दो बजाज पल्सर बाइक से जुड़े दस्तावेज, कुछ सोने के जेवरात और मुथूट फाइनेन्स से जुड़े कागजात बरामद किये.
यह भी तथ्य सामने आया है कि डकैती में मोटर बाइक का उपयोग करने के बाद एक बाइक को अपराधियों ने चिरकुंडा में बेच दिया था. रिमांड अवधि समाप्त होने पर उन्हें गुरु वार को सीआईडी के जांच अधिकारी अरिजीत भट्टाचार्या ने आसनसोल महकमा न्यायालय में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रभारी) छठे न्यायिक दंडाधिकारी श्यामल चक्र बर्ती के समक्ष पेश किया.
जांच अधिकारी ने मामले में आईपीसी की धारा 412 नये सिरे से जोड़ने, आरोपियों का टीआई पैरेड कराने, आरोपियों के दसों अंगुलियों का फिंगर प्रिंट लेने और सभी आरोपियों के फोटो लेने के साथ ही शंशाक की हैंडराइटिंग लेने की अपील की. जिसे अदालत ने मंजूर किया. 12 फरवरी को जेल में ही इनका टीआई परेड होगा, जिसमें मुथूट फाइनेन्स के कर्मी और अधिकारी को इनकी पहचान करनी होगी. 15 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई होगी. इसी दिन अदालत में केस डायरी पेश करने को आदेश न्यायिक दंडाधिकारी ने दिया.
क्या है मामला
23 दिसंबर को सुबह आठ बजकर 55 मिनट पर मुथूट फाइनेन्स आसनसोल कोर्ट मोड़ शाखा खुलते ही यहां डाका पड़ा. छह की संख्या में अपराधियों ने संस्था के कर्मियों को हथियारों की नोक पर बंधक बनाकर 27 किलो सोने की जेवरात और साढ़े चार लाख रु पया नगदी की लूट की और आसानी से तीन बाइकों से फरार हो गये. जांच में सहयोग के लिए पहुंची सीआईडी की टीम ने अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए तीन राज्यों में लगातार छापामारी अभियान शुरू किया. पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्न इलाके में बिहार पुलिस की एसटीएफ के साथ मुठभेड में डकैती कांड का सरगना सुबोध कांत सिंह अपने सहयोगियों के साथ 19 जनवरी को गिरफ्तार हुआ.
इनकी निशानदेही पर राजीबनगर थाना पुलिस ने इनके कुछ साथियों को भी गिरफ्तार किया. इनके पास से 15.800 किलो सोने के जेवरात भी बरामद हुए. प्राथमिक पूछताछ में इनलोंगों कबूल किया कि मुथूट डकैती कांड को इनलोंगों ने ही अंजाम दिया था. इसके साथ ही दुर्गापुर में मणिपुरम गोल्ड लोन संस्था सहित डनलप और बरानगर में भी वित्तीय संस्थान में डकैती की है. इसके उपरांत मामले की जांच 22 जनवरी को सीआईडी को सौंप दी गयी. इसी बीच हीरापुर थाना प्रभारी ने ठाकुर नवरंग कुमार सिंह, राजीब सिंह और शशांक सिंह के लिए सोन अरेस्ट और प्रोडक्शन वारंट के लिए आसनसोल अदालत में अपील की.
अदालत ने अपील मंजूर की. 25 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट के आधार पर तीनों को पटना बेऊर जेल से आसनसोल महकमा अदालत में पेश किया गया. मामले के जांच अधिकारी सीआईडी के अवर निरीक्षक श्री भट्टाचार्या ने आरोपियों की 14 दिन की पुलिस कस्टडी की अपील की, जिसे अदालत ने मंजूर की.
दो बाइक चिरकुंड़ा से खरीदी और एक बेची
जांच के दौरान गिरोह की कार्यप्रणाली चौंकानेवाली मिली है. इस डकैती कांड में छह अपराधियों ने तीन पल्सर बाइकों का उपयोग किया था. इनमें से एक बाइक उन्होंने बिहार के किसी इलाके से चुरायी थी. जबकि दो बाइकों की खरीदारी उन्होंने चिरकुंडा के एक शोरूम से की थी. इनमें एक बाइक नयी और एक बाइक पुरानी थी. उन्होंने पुरानी बाइक को 48 हजार रूपये में खरीदा, जबकि नयी बाइक की खरीदारी उन्होंने शंशाक के दस्तावेजों से की. नयी बाइक में उन्होंने कुछ राशि उधार रखी थी.
दोनों बाइकों की खरीदारी 22 दिसंबर को की गयी थी. 23 दिसंबर को घटना को अंजाम देने के बाद अपराधियों ने पुन: पुरानी बाइक उसा शोरूमको वापस कर दी तथा 48 हजार रूपये का समायोजन करा दिया. नयी बाइक लेकर वे बिहार चले गये तथा तीसरी चुरायी गयी बाइक को उन्होंने निरसा थाना इलाके में छोड़ दिया. सीआईडी ने उक्त शोरूम से कई दस्तावेज, चालान, सेल्स रजिस्टर आदि जब्त किये हैं. साथ ही वहीं के सीसीटीवी फुटेज की भी मांग की है.
रिमांड में बरामद हुआ जेवरात
14 दिन की रिमांड में तीनों आरोपियों ने बताया कि घटना का मास्टर माइंड सुबोध कांत सिंह और मनीष सिंह है. मनीष के पास बचे हुए जेवरात है. सुबोध फिलहाल जयपुर (राजस्थान) पुलिस के कब्जे में है. मनीष की गिरफ्तारी के लिए सीआईडी टीम ने बिहार ले जाकर छापामारी की. लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई. सीआईडी की टीम ने शशांक सिंह की निशानदेही पर सहरसा सदर थाना क्षेत्न अंतर्गत गौतम नगर विश्वकर्मा ढाला में स्थित उसके आवास में पांच फरवरी को छापामारी कर एक लॉकेट लगा हुआ सोने का नेकलेश, एक बिना लॉकेट का सोने का नेकलेश (जो मुथूट से लूटा गया था), दो सोने का कंगन, एक सोने की चूडी, मुथूट के ग्राहकों से जुड़े कागजात बरामद किये .
टीआई परेड की मांग
जांच अधिकारी श्री भट्टाचार्या ने मामले में टीआई परेड कराने, आईपीसी की धारा 412 जोडने, फिंगर प्रिंट्स की जांच और तीनों का फोटो लेने की अपील की. जिसे अदालत ने मंजूर किया. 12 फरलरी को टीआई परेड न्यायिक हिरासत में जेल में ही करने का अदालत ने आदेश दिया. सभी आरोपियों के फिंगर प्रिंट लेकर घटना स्थल से संग्रह फिंगर प्रिंट से मिलाया जायेगा. फोटो लेकर सीसीटीवी फुटेज के साथ मिलाया जायेगा. कानूनी रूप से साक्ष्य को मजबूत करने के लिए यह प्रक्रि या अपनायी जा रही है.
जयपुर में सुबोध से सीआईडी ने की पूछताछ
मुथूट डकैती कांड के सरगना सुबोध से सीआईडी के अधिकारियों ने गुरु वार को जयपुर में जाकर पूछताछ की. पटना में सुबोध के गिरफ्तार होने के बाद राजस्थान पुलिस ने जयपुर में वित्तीय संस्थान लूट कांड में वारंटी सुबोध को वारंट के आधार पर जयपुर लेकर चली गयी. सुबोध से जयपुर में जाकर पूछताछ करने के लिए सीआईडी ने अदालत में इंट्रोगेशन की अपील की थी. जिसे अदालत ने मंजूरी दी थी. इसी मंजूरी के आधार पर सुबोध से पूछताछ के लिए सीआईडी की टीम जयपुर गयी है. गुरु वार को सीआईडी अधिकारी ने सुबोध से पूछताछ की.
दुर्गापुर थाना पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट की अपील की
डीसीपी (ईस्ट) अभिषेक मोदी ने बताया कि पांच जून 2017 को दुर्गापुर थाना क्षेत्न अंतर्गत बेनाचट्टी इलाके में स्थित मणिपुरम गोल्ड लोन संस्थान में हुए डकैती कांड में ठाकुर नवरंग कुमार सिंह, राजीब सिंह और शशांक सिंह की संलिप्तता सामने आयी है. जिसके आधार पर तीनों आरोपियों को दुर्गापुर अदालत में पेश करनेके लिए गुरु वार दुर्गापुर थाना पुलिस अदालत में प्रोडक्शन वारंट की अपील की. प्रोडक्शन वारंट के आधार पर आरोपियों के दुर्गापुर अदालत में पेश होते ही इन्हें पुलिस कस्टडी के लिए अदालत से अपील की जायेगी. सनद रहे कि पांच जून को दुर्गापुर में मणिपुरम गोल्ड लोन संस्था में डकैती हुयी थी.
संस्था के बेनाचट्टी शाखा के प्रभारी कौशिक घोष ने दुर्गापुर थाने में डकैती की शिकायत दर्ज करायी थी. जिसमे उन्होंने अज्ञात चार अपराधियों को लूट कांड में शामिल होने का जिक्र किया था. सोना और नगदी राशि लूटे जाने की शिकायत की थी. शिकायत के आधार पर दुर्गापुर थाना कांड संख्या 346/2017 में आईपीसी की धारा 392 और आर्म्स एक्ट 25(1बी)(ए)/35 के तहत मामला दर्ज हुआ था.
