दुर्गापुर : दुर्गापुर में इन दिनों अज्ञात बुखार का कहर जारी है. काफी संख्या में लोग इसकी चपेट में आकर दुर्गापुर महकमा अस्पताल सहित विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत है. बुखार को लेकर लोगों में संशय है. कुछ लोग इसे डेंगू बता रहे हैं क्योंकि इसके लक्षण डेंगू से काफी मिलते-जुलते हैं. परन्तु अधिकारिक तौर पर इसे डेंगू नहीं कहा जा रहा है. इसे बुखार कहा जा रहा है. अभी तक दो की मौत इस बुखार की चपेट में आने से हो चुकी है.
दुर्गापुर महकमा अस्पताल में तकरीबन एक सौ से अधिक लोग इससे पीड़ित होकर इलाजरत है. महकमा अस्पताल के सुपर देवव्रत दास के अनुसार अभी तक 15 मरीजों के रक्त में डेंगू के कीटाणु पाये गये हैं. उन्होंने कहा िक महकमा अस्पताल में डेंगू के इलाज की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. जिन्हें डेंगू ने जकड़ा है, उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है. लेकिन दुर्गापुर नगर निगम इलाकों में डेंगू ने पैर पसार दिया है, इसे मानने को निगम प्रशासन बिल्कुल तैयार नहीं है.
मेयर परिषद के सदस्य(स्वास्थ्य) राखी तिवारी का कहना है िक कुछ लोग डेंगू को लेकर दुष्प्रचार कर रहे हैं. निगम इलाके में डेंगू नहीं है. सभी वार्डों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है. निगम सफाई में कोताही नहीं बर्दाश्त नहीं करेगा. फॉगिंग अभियान तेज कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ वार्ड पार्षदों की निगरानी में फॉगिंग कराई जा रही है, लेकिन ऑटोनुमा गाड़ी पर फॉगिंग मशीन होने के कारण संकरी गली व कच्ची गलियों में यह गाडियां नहीं पहुंच पा रही है. इससे लोगो में थोड़ी नाराजगी है.
दुर्गापुर महकमा शासक शंख सांतरा ने बताया कि डेंगू के अभी तक 21 मरीज पाये गये थे. इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके है. केवल दो लोगों का इलाज चल रहा है. नये मामले अभी तक सामने नहीं आये हैं. डेंगू को लेकर पूरे महकमा में सतर्कता बरती जा रही है. यह अभी पूरी तरह नियंत्रण मे है. उन्होंने कहा कि घबराने बाली कोई बात नहीं है.
जागरूकता जरूरी
बढ़ती ठंड में डेंगू एक बार फिर से डर और बेचैनी का माहौल पैदा कर रहा है. जानकारों का मानना है कि इसके लिए स्वयं भी जागरूक होना पड़ेगा. एडीज मच्छर के काटने से व्यक्ति डेंगू की चपेट में आता है.
लेकिन बहुत से लोगों को जानकारी नहीं है कि 99 प्रतिशत मामलों में घबराने की जरूरत नहीं होती. डेंगू के ज्यादातर मामलों में बचाव हो सकता है. इसके इलाज और रोकथाम के बारे में लोगों को जागरूक करना जरूरी है. उनका कहना है कि डेंगू बुखार मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी है. यह चार किस्मों के डेंगू वायरस के संक्रमण से होती है. यह मादा ऐडीज मच्छर के काटने से फैलती है.
डेंगू के लक्षण, कभी घबरायें नहीं
डेंगू में तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं. हालांकि कुछ बच्चों में लाल और सफेद निशानों के साथ पेट खराब, जी मिचलाना, उल्टी इत्यादि हो सकती है. डेंगू के मरीजों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिये. उन्हें आराम करना चाहिए और काफी मात्रा में तरल आहार लेना चाहिये. बुखार या जोडों के दर्द को कम करने के लिए चिकित्सकों के मुताबिक पैरासीटामोल टेबलेट ली जा सकती है.
अगर लोगों को खतरे के संकेतों की जानकारी हो तो जान जाने से बचाई जा सकती है. अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10000 से ज्यादा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की कोई आवश्यकता नहीं होती. अनुचित प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन नुकसान कर सकता है. डेंगू को रोका भी जा सकता है और इसका इलाज भी किया जा सकता है, इसलिए लोगों को घबराना नहीं चाहिए.
जमा न होने दें कहीं पानी
जानकारों का कहना है कि टंकी का ओवरफ्लो हुआ पानी छत पर रखे पात्रों में गिर जाता है, यदि यह पानी खाली नहीं होता है तो अधिक दिन होने पर इसमें भी लारवा पनप सकता है. इसलिए टंकी भरते ही बटन बंद कर देना चाहिये. फ्रिज में जमा पानी भी डेंगू के मच्छर को पनपने में मदद कर सकता है. पानी नहीं जमने को लेकर नगर निगम के साथ लोगों को भी जागरुक होना होगा.
