परंपरागत तरीके से मनाया गया मां दुर्गा के आगमन का सूचक माने जानेवाला पर्व महालया

मां दुर्गा को धरती पर बुलाने के लिए ‘जागो मां तुमि जागो’ का आह्वान मंत्रोच्चारण से गुंजायमान हुआ शिल्पांचल, जमकर हुई आतिशबाजी दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल के सबसे लोकप्रिय महोत्सव दुर्गापूजा के पहले महिषासुरमर्दनी, जगत जननी मां दुर्गा के आगमन का सूचक माने जाने वाला पर्व महाल्या मंगलवार को पूरे राज्य के साथ-साथ शिल्पांचल सहित […]

मां दुर्गा को धरती पर बुलाने के लिए ‘जागो मां तुमि जागो’ का आह्वान
मंत्रोच्चारण से गुंजायमान हुआ शिल्पांचल, जमकर हुई आतिशबाजी
दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल के सबसे लोकप्रिय महोत्सव दुर्गापूजा के पहले महिषासुरमर्दनी, जगत जननी मां दुर्गा के आगमन का सूचक माने जाने वाला पर्व महाल्या मंगलवार को पूरे राज्य के साथ-साथ शिल्पांचल सहित पूरे िजले में परंपरागत तरीके से मनाया गया. इस पावन अवसर पर ‘या देवी सर्वभुतेषु, शिक्तरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:’ के उद्घोष से पूरा शिल्पांचल गूंज उठा.
बंगाली समुदाय के लोगों ने मां दुर्गा को धरती पर बुलाने के लिए ‘जागो मां तुमि जागो’ का आह्वान किया. इस दिन तड़के सुबह से ही चारों तरफ जमकर आतिशबाजी शुरू हो गई. क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर होम का आयोजन किया गया तथा उसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया. कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्र म आयोजित किये गए.
महालया के दिन प्रसारित होने वाले मिहषासुरमर्दनी भारतीय संस्कृति में एक अतुलनीय रचना है. इसका कथानक काफी प्रभावी है. राक्षसराज महिषासुर का जुल्म देवताओं के विरुद्ध बढ़ता ही जा रहा था.
उसके जुल्मों से त्रस्त देवता विष्णु के पास जाकर त्राहिमाम करने लगे. तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिशक्ति ने अपनी सम्मिलित शक्ति से दस भुजाओं वाली शक्ति का निर्माण िकया. उसे जगतजननी मां दुर्गा कहा गया. उनमें विश्व की सारी शक्तियां निहित थीं. फिर अन्य देवताओं ने उन्हें अपनी शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित िकया.
किसी योद्धा की तरह सुसज्जित होकर मां सिंह पर सवार होकर महिषासुर से संग्राम करने चलीं. घमसान युद्ध के बाद मां ने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया. स्वर्ग और पृथ्वी लोक को महिषासुर के आतंक से मुक्ति मिली. शक्ति के समक्ष समस्त जगत नतमस्तक हुआ और मां का मंत्रोच्चार करने लगे.
पितृपक्ष का समापन और देवीपक्ष का शुभारम्भ : दुर्गापुर. पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए जो दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है, उसे हम महालया अमावश्या के नाम से जानते हैं.
श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृपक्ष भी कहते हैं, भाद्र पद मास की पूर्णिमा को प्रारंभ होता है तथा 16 दिनों के बाद आश्विन मास की अमावश्या को समाप्त होता है और इसी अमावस्या को ही महालया अमावस्या भी कहते हैं. आज ही के दिन पितृपक्ष का समापन और देवीपक्ष का शुभारम्भ होता है. इस दिन सुबह से ही दामोदर और अजय नदी के विभिन्न घाटों पर तर्पण करने वालों की भारी भीड़ देखी गई. लोगों ने नदी घाटों पर पवित्र स्नान कर मंत्रोच्चारण के बीच पितरों का तर्पण एवं पिंडदान किया. शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार देवी पक्ष के पूर्ववती कृष्ण प्रतिपदा के दिन पितर मृत्यु लोक में उत्तर आते हैं.
इसलिए महालया के दिन पितरों को जल अिर्पत किये जाने की परंपरा है. ऐसा मानना है कि सर्वपितृ विसर्जन या महालया अमावस्या के दिन ब्राह्मणों, गायों, कौओं और बूढ़े-बुजुर्गों के रूप में किन्हीं भी चार जीवों को भोजन कराये तो उसके पितर संतुष्ट हो जाते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि श्राद्ध पक्ष के समय ही भारतीय उपमहाद्वीप में नई फसलें पकनी शुरू होती हैं, जो कि हिन्दू नववर्ष के अनुसार साल की पहली फसल होती है.
इसलिए हमारे पूर्वजों का सम्मान करने और उनका आभार प्रकट करने के उद्देश्य से नई फसल का पहला अन्न उन्हे पिंड के रूप में भेंट किया जाता है. इसके बाद ही लोग नवरात्रि, विजयादशमी और दीपावली जैसे त्यौहारों का जश्न मनाते हैं.
रानीगंज में गूंजा दुर्गा सप्तशती का पाठ: रानीगंज. मंगलवार को महालया के अवसर पर प्रात: से ही ‘या देवी सर्वभूतेषु के चंडी पाठ से रानीगंज, जामुिड़या शहर गूंज उठा.
शक्तिरूपेण मां दुर्गा के आगमन के िलये बच्चों ने देवी के स्वागत में आतिशबाजी की. पहली बार रानीगंज बोरो ने चंडी पाठ को लेकर माइक लगाया, िजससे पाठ के शब्द पूरे शहर में गूंज रहे थे. लोगों ने प्रात: नहा-धोकर पूजा-अर्चना कर पितरों को तर्पण किया. दूसरी ओर परंपरा के अनुसार महालया के दिन रानीगंज के दामोदर नदी एवं जामुिड़या के अजय घाट में हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर स्नान कर अपने पितरों को जल अिर्पत कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की.
इस अवसर पर कई जगह कई दुकानदारों ने दुकान के सामने ढोल बजाकर भी ग्राहकों का स्वागत िकया. रानीगंज बोरो चेयरपर्सन संगीता शारदा ने बताया िक आसनसोल नगर निगम के मेयर के निर्देश पर नगर निगम के अंतर्गत जितने भी बोरो हैं, सभी में प्रात: चार से सात बजे तक चंडी पाठ सुनायी पड़ा. उन्होंने कहा कि आसनसोल नगर निगम सर्वधर्म समभाव को लेकर सभी धर्मों का श्रद्धा कर उनके आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है.
तर्पण देकर शुरू हुआ महालया का पुण्य प्रभाव: पानागढ़. पूर्व-पश्चिम बर्दवान िजले के दामोदर नदी, अजय नदी तथा अन्य सरोवरों में मंगलवार को तर्पण देकर महाल्या का पूर्ण प्रभाव शुरू हुआ. पानागढ़ स्थित दामोदर नदी तथा अजय नदी में हजारों लोगों ने स्नान किया तथा अपने पितरों को तर्पण दिया.
इसी के साथ महालया का बिगुल आज से बज गया. बर्दवान सदर घाट सेतु के नीचे स्थित दामोदर नदी में हजारों की संख्या में लोगों ने अपने पितरों को याद करते हुये पितृ पक्ष के दिन तर्पण किया. बताया जाता है कि पितृ पक्ष के बाद महालया का भी श्रीगणेश हो गया. वीरभूम िजले में भी मृतक के परिजनों ने तर्पण देकर पितृपक्ष का पालन किया.

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