साहित्यकार और पत्रकार दोनों ही दिखाते हैं समाज को आइना

‘वर्तमान समय में साहित्य, पत्रकािरता के समक्ष चुनौितयां’ पर संगोष्ठी आयोिजत पत्रकार िकशन कालजयी हुए सम्मानित रानीगंज : पत्रकार किशन कालजयी ने कहा िक साहित्य और पत्रकािरता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों ही समाज के दर्पण हैं. मेरे पिताजी कभी नहीं चाहते थे कि मैं साहित्यकार और पत्रकार बनूं. वो मुझे एक […]

‘वर्तमान समय में साहित्य, पत्रकािरता के समक्ष चुनौितयां’ पर संगोष्ठी आयोिजत
पत्रकार िकशन कालजयी हुए सम्मानित
रानीगंज : पत्रकार किशन कालजयी ने कहा िक साहित्य और पत्रकािरता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों ही समाज के दर्पण हैं. मेरे पिताजी कभी नहीं चाहते थे कि मैं साहित्यकार और पत्रकार बनूं. वो मुझे एक अधिकारी के रूप में देखना चाहते थे. लेकिन मेरे अंदर की आत्मा ने इसकी गवाही नहीं दी और मैंने उनकी इच्छाओं के परे जाकर पत्रकािरता को आत्मसात िकया.
देश के बड़े- बड़े समाचार पत्रों में काम करने का अवसर मिला. लेकिन प्रबंधन के दबाव में कुंद पड़ती जा रही लेखनी को धार देने के िलये मैंने स्वतंत्र पत्रकािरता शुरू की. विडंबना है कि आज के दौर में पत्रकािरता िवशुद्ध रूप से व्यवसाय बन गयी है. िवज्ञापनों की होड़ में खबरों की चमक फीकी हो गयी है. सच्ची पत्रकािरता गुम होती जा रही है. इसे रोकने की जरूरत है. श्री कालजयी सुरक्षा एवं पीबी टीवी के संयुक्त तत्वावधान में रानीगंज के मां दुर्गा अपार्टमेंट में आयोिजत विचार गोष्ठी में बोल रहे थे.
‘वर्तमान समय में साहित्य एवं पत्रकािरता के समक्ष चुनौितयां’ संगोष्ठी का िवषय था. संगोष्ठी के दौरान पत्रकार श्री कालजयी को सम्मानित भी िकया गया. इससे पहले रानीगंज के समाजसेवी आरपी खेतान ने सरस्वती वंदना कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया. श्री खेतान ने कहा कि फ़ख्र हो रहा है िक देश के गणमान्य कवि, साहित्यकार, पत्रकार यहां उपस्थित हुये हैं. एक गंभीर विषय पर परिचर्चा शुरू की गयी है. उन्हें विश्वास है कि इसका असर दूर तक जायेगा.
सामाजिक िवकास में साहित्य, समाचार पत्र अहम : संगोष्ठी का संचालन करते हुए साहित्यकार रविशंकर सिंह ने कहा कि समाज को आगे ले जाने में साहित्य और समाचार पत्र दोनों ही अहम भूमिका निभा रहे हैं. पत्रकार प्रतिदिन की खबरों को उजागर करते हैं, साहित्यकार सामाजिक गतिविधियों को समयानुसार िलखते हैं.
गंगा आंदोलन में सक्रिय भूमिका िनभाने वाले कवि, साहित्यकार डॉक्टर आशुतोष ने कहा कि चुनौतियां कल भी थी और आज भी है. उसी के अंदर रह कर काम करने की जरूरत है. मैंने भी पत्रकािरता िसर्फ इसलिये त्याग िदया था क्योंिक सच्ची पत्रकािरता मैनेजमेंट के दबाव में रहकर नहीं की जा सकती है. संपादक भी अब मैनेजमेंट के सामने लाचार नजर आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता जोखिम भरी है. आने वाले समय में इसमें और अधिक इजाफा होगा. क्षेत्रीय पत्रकािरता करने वाले सावधान रहें.
उनके माथे पर खतरा मंडरा रहा है. वैकल्पिक तैयारी शुरू कर दें. वर्तमान में वेब मीडिया स्वतंत्र पत्रकािरता को नया आयाम दे रही है. यहां िवचारों को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने पर पाबंदी नहीं रहती है. हम इन माध्यमों से अपनी बातं रख सकते हैं.
स्वच्छन्द पत्रकािरता पर हावी हो रहा प्रबंधन: पत्रकार व साहित्यकार राज्यवर्धन ने कहा िक चुनौतियां हैं और हमेशा रहेंगी. लेकिन इसी में तारतम्यता स्थापित कर काम करना भी होगा. अच्छे पत्रकार तथा साहित्यकारों की कमी है. वैकल्पिक रोजगार नहीं मिलने पर लोग इस क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं.
बाद में इस मकड़जाल से निकलना उनके लिये मुश्किल साबित होता है. साहित्य और पत्रकािरता दोनों की समाज को आगे ले जाना चाहते हैं. लेकिन ध्रुवीकरण की वजह से स्वच्छ पत्रकािरता नहीं हो पा रही है. ऐसा नहीं है कि साहित्य के सामने चुनौती नहीं है, अनेकों मैगजीन को निकालने पर प्रतिबंध भी लगाया जा चुका है. पत्रकार डॉक्टर डीपी बर्नवाल ने कहा िक विषम परिस्थितियां हैं. संपादक के हाथ भी बंधे हैं. मैनेजमेंट उस पर हावी हो गया है.
चुनौतियां हैं, तब ही काम में भी है आनंद : कवि साहित्यकार रामजी यादव ने कहा िक समाज को दिशा दिखाना व्यवसाय बन गया है. पत्रकार कुमार जितेंद्र ने कहा कि चुनौतियां हैं, इसलिए काम करके आनंद भी है.
लेकिन हमें अपना कर्त्तव्य िनभाना होगा. पत्रकार िवमल देव गुप्ता ने कहा िक जब तक दुनिया रहेगी पत्रकारों एवं साहित्यकारों के सामने चुनौतियां भी रहेंगी. प्रत्येक समाज में भला बुरा है. हमें अपने काम को लगन एवं निष्ठा से करना है. कोई जरूरी नहीं है कि इस क्षेत्र में रहना ही होगा. लेिकन जो भी इस क्षेत्र में आये हैं, उन्हें ईमानदारी पूर्वक काम करनी चाहिये. मौके पर प्रोफेसर महेंद्र कुशवाहा, त्रिलोकनाथ सिंह, अशोक आशिष, निशांत मानकर, मनोज सिंह, संजय पासवान, समाजसेवी अरविंद सिंहानिया ने भी अपने वक्तव्य रखें.

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