आद्रा : वर्षों पहले स्कूल में अपने पिता के साथ स्कूल के बेंच तैयार करने आये थे लेकिन बेंच बनाते-बनाते स्कूल में पढ़ने लगे. देखते ही देखते स्कूल से माध्यमिक परीक्षा पास कर ली और इसी स्कूल में अस्थायी शिक्षक के तौर पर कार्य करने लगे. बाद में स्थायी शिक्षक बन गये.
बांकुड़ा जिला के केंचाकुड़ा गांव के रहने वाले शिक्षक द्विजपद सूत्रधर आज 70 वर्ष के हो गये हैं. वर्षो पहले पुरूलिया जिला के काशीपुर प्रखंड अन्तर्गत सोनाथली कालापाथर उच्च माध्यमिक विद्यालय आये थे पिता के साथ काम करने लेकिन रिटायर होने के 10 साल बाद भी आज वे स्कूल में ही रह गये हैं. बिना तनख्वाह के छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं. श्री सूत्रधर ने बताया कि लगभग 64 वर्ष पहले वह अपने पिता के साथ सोनाथली कालापाथर उच्च माध्यमिक विद्यालय में बेंच निर्माण करने आये थे. काम करते करते दूसरे बच्चों को स्कूल में पढ़ते देख पिता से स्कूल में पढ़ने की ज़िद करने लगे.
पिताजी ने कहा कि हमलोग गरीब हैं तुम अगर पढ़ाई करोगे तो कमाई कौन करेगा? मैंने पिताजी को भरोसा दिलाया कि मैं पढ़ाई के साथ साथ काम भी करूंगा. अंत में मेरी जिद के कारन पिताजी ने मुङो इस स्कूल में पढ़ने का अनुमति दे दी. मेरा स्कूल में दाखिला हुया. इस स्कूल से मैंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली स्कूल में 50 रु पये तनख्वाह पर अस्थायी रूप से शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्य करने लगा. बाद में स्नातक पास कर मैंने स्कूल में ही स्थायी रूप से शिक्षक के पद पर कार्य करना आरंभ कर दिया. वर्ष 2007 में स्कूल से अवसर प्राप्त कर घर लौटा.
लेकिन दिल नहीं लगने के कारण मैं पुन: कुछ दिनों के बाद स्कूल चला आया. स्कूल के शिक्षकों से मैंने निवेदन किया कि मुझे बिना तनख्वाह दिये स्कूल में पढ़ने का अवसर दें. सभी ने मेरी बात मान ली. मुझे स्कूल के छात्रावास में कमरा दिया गया, जो आज मेरा घर ही नहीं मंदिर है. बस क्या था?
मैंने छात्र-छात्रओं को पढ़ाने का कार्य आरंभ कर दिया. पढ़ाई के साथ-साथ मैंने स्कूल के वातावरण को ठीक रखने के लिए पेड़ लगाना भी आरम्भ कर दिया. इसमें छात्र-छात्रएं भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे. मै अपने जीवन के अंतिम समय तक इस स्कूल में ही रह कर बच्चों को पढ़ाने तथा स्कूल के पर्यावरण को ठीक रखने के लिए कार्य करता रहूंगा.
स्कूल के प्रधान शिक्षक अमरनाथ पाण्डे ने कहा द्विजपद सूत्रधर हमारे लिए प्रेरणा हैं. उनके पढ़ने से लेकर स्कूल की साफ-सफाई पेड़ लगाने, बच्चों को खेल-खेल में पढ़ने के तरीके बताना सभी को प्रेरित करता है. मास्टर मोशाय जब तक चाहेंगे हमलोग उन्हें स्कूल में शिक्षा प्रदान करने का मौका देंगे.
स्कूल के छात्र अर्पण, विक्रम सुमन, सिद्धार्थ ने कहा कि सुबह-सुबह नींद खुलते ही हमलोग देखते हैं कि मास्टर मोशाय हमारे लिए चाय तैयार कर रहे हैं. चाय पिलाते हैं. स्कूल की सफाई के साथ-साथ पेड़ लगाने, पेड़ों की पहचान करने की जानकारी देते हैं, खेल-खेल में पढ़ाते हैं.
रात को सोते समय भी हमलोग का ध्यान रखते हैं. हमलोग जब घर छोड़कर स्कूल के छात्रवास में आये थे तो हमलोग को घरवालों की काफी याद आती थी. लेकिन द्विजपद मास्टर मोशाय ने हमलोगों को इतना प्यार दिया कि हमलोग को कभी घर की याद ही नहीं आई.
