छह अंकों का प्रश्न नहीं, ग्रेस भी नहीं

विडंबना. गलती केएनयू परीक्षा विभाग की, खामियाजा भोग रहे हिंदी के सैकड़ों परीक्षार्थी आसनसोल : काजी नजरूल विश्वविद्यालय (केएनयू) के परीक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा हिंदी के पार्ट -टू के परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ रहा है. सामान्य पेपर टू के प्रश्नपत्र में हुयी गड़बड़ी के बारे में परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जांच रहे शिक्षकों […]

विडंबना. गलती केएनयू परीक्षा विभाग की, खामियाजा भोग रहे हिंदी के सैकड़ों परीक्षार्थी
आसनसोल : काजी नजरूल विश्वविद्यालय (केएनयू) के परीक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा हिंदी के पार्ट -टू के परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ रहा है.
सामान्य पेपर टू के प्रश्नपत्र में हुयी गड़बड़ी के बारे में परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जांच रहे शिक्षकों को यूनिवर्सिटी के स्तर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से वे भी दुविधा के शिकार है. जबकि परीक्षार्थियों का दावा है कि उन्हें ग्रेस में छह अंक मिलने चाहिए. सनद रहे कि कुलपति डॉ साधन चक्रवर्ती ने इस संबंध में उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था.
उठ रहे कई सवाल परीक्षा से संबंधित
शिक्षकों का कहना है कि प्रश्न तीन कुल 48 अंकों का है. इसमें गद्य की व्याख्या लिखनी है तथा सभी के 12-12 अंक है. पहला सवाल यह है कि छह अंकों के प्रश्नों का विकल्प 12 अंक का प्रश्न कैसे हो सकता है? दूसरा सवाल यह कि प्रश्न चार के जिन तीन काव्य उद्धरणों की चर्चा की जा रही है, वे क्रमिक रूप में हैं. उनके क्रमांक में कोई विसंगति नहीं है.
सवाल तीसरा यह है कि परीक्षार्थियों को सिर्फ चार व्याख्या ही लिखनी थी, तो यदि उनकी एक व्याख्या प्रश्न दो में समायोजित होगी तो प्रश्न चार के 12 अंकों का क्या होगा? अंतिम सवाल यह कि परीक्षार्थियों को तो यह पता ही नहीं था कि उनका उद्धरण कहां है, तो इस वैकल्पिक व्यवस्था का औचित्य ही नहीं है. शिक्षकों का कहना है कि इतने दावपेंच से परीक्षार्थियों का ही भविष्य खराब होगा .

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