इस धारा का प्रयोग होने के कारण अदालत से विक्रम को जमानत मिल गयी थी, लेकिन मामले की जांच चलने के दौरान अदालत में चार गवाहों ने अपना गोपनीय बयान दर्ज कराया. इसकी रिपोर्ट में पुलिस को पता चला कि विक्रम घटना के दिन काफी शराब पी रखी थी.
यही नहीं कार की फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी यह पाया गया कि घटना के 4.6 सेकेंड पहले विक्रम की कार की रफ्तार 105 किलोमीटर प्रति घंटे और 1.5 सेकेंड पहले कार की रफ्तार 95 किलोमीटर प्रति घंटे थी. कार लेकर जब विक्रम नाइट क्लब से निकला था, उस समय से लेकर दुर्घटना होने तक कार की रफ्तार 92-115 किलोमीटर के बीच थी. जांच के दौरान पुलिस को मिले इन तथ्यों के बाद अलीपुर कोर्ट में इस मामले में विक्रम के खिलाफ आइपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) जोड़ने का आवेदन किया गया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. वहीं इस मामले में विक्रम के वकील अनिर्वान गुह ठाकुरता व राजदीप मजूमदार का कहना है कि आइपीसी की धारा 304 जोड़ने का मतलब यह नहीं कि विक्रम को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाय. अदालत के इस निर्देश के बाद उच्च अदालत में जाने के बारे में वह विचार विमर्श कर रहे हैं.
