अनिसुर की टिप्पणी से गरमायी राजनीति

कोलकाता : माकपा के वरिष्ठ नेता अनिसुर रहमान द्वारा कथित तौर पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को लेकर की गयी टिप्पणी के बाद राजनीति गरमा गयी है. उनकी टिप्पणी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया की गयी है. क्या है मामला : बीरभूम […]

कोलकाता : माकपा के वरिष्ठ नेता अनिसुर रहमान द्वारा कथित तौर पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को लेकर की गयी टिप्पणी के बाद राजनीति गरमा गयी है. उनकी टिप्पणी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया की गयी है.

क्या है मामला : बीरभूम जिले में आयोजित सभा के दौरान माकपा नेता ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था कि बंगाल में सारे मंत्री ममता के कहे अनुसार ही चलते हैं. वे बिना उनकी अनुमति के व्यक्तिगत कार्य भी नहीं कर सकते.

मुकुल पर भी टिप्पणी

अनिसुर रहमान ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल राय की भी सत्तारूढ़ पार्टी में कई विपक्षी विधायकों को शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आलोचना की थी. इससे पहले भी माकपा के वरिष्ठ नेता ने ममता बनर्जी के कई फैसलों को लेकर उनकी आलोचना की थी. दिसंबर 2012 में सुश्री बनर्जी पर उनकी सरकार के उस फैसले के लिए हमला बोला था, जिसमें दुष्कर्म पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 20 हजार रुपये देने की बात कही गयी थी. अनिसुर रहमान पूर्व वाम मोरचा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे.

पार्थ ने की अनिसुर की निंदा : मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि रहमान को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया जायेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ पहले भी रहमान ने ईल टिप्पणी की थी. उनके माफी मांगने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था, लेकिन इस बार मामले को उसके तार्किक अंजाम तक ले जायेंगे. राज्य शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम (बॉबी) ने कहा कि पूर्व मंत्री में कैसी शिष्टता है या उन्हें कैसी शिक्षा मिली है यह उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है. ऐसी टिप्पणी बेतुकी है और बंगाल की जनता माकूल जवाब देगी. श्रम मंत्री पूण्रेंदु चटर्जी का कहना है कि टिप्पणी में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है उससे मार्क्‍स और लेनिन को भी स्तब्ध होना पड़ता. मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने कहा कि यह खेदजनक है. तृणमूल की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि यह दर्शाता है कि माकपा नेता राजनैतिक रूप से दिवालिया हो गये हैं और वे हताशा में इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं.

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