कोलकाता/दिल्ली : दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने आगामी 12 मार्च को रामलीला मैदान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रैली में आने के निमंत्रण को ठुकराते हुए कहा है कि वह अन्ना हजारे के साथ मंच साझा नहीं करेंगे. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने उनके इस कदम पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि शाही इमाम और उसके बीच अच्छे रिश्ते हैं.
बुखारी ने आज बातचीत में कहा, मैं ममता का कई मुद्दों पर समर्थन करता हूं, लेकिन अन्ना का समर्थन नहीं करता. अन्ना के आंदोलन का आरएसएस ने साथ दिया था और खुद अन्ना ने आरएसएस के साथ अपने रिश्ते के बारे में कोई सफाई नहीं दी है. ऐसे में मैंने पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय से कह दिया है कि मैं रैली में शामिल नहीं हो सकूंगा. दरअसल, अन्ना आगामी लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं. इसी क्रम में रामलीला मैदान में ममता और अन्ना रैली कर रहे हैं. पार्टी के मुताबिक इस रैली के लिए बुखारी को भी न्यौता दिया गया था.
पिछले दिनों ममता खुद जामा मस्जिद गई थीं और जामा मस्जिद के सूत्रों का कहना है कि शाही इमाम और मुकुल रॉय हाल के दिनों में निरंतर संपर्क में रहे हैं.बुखारी के रैली में शामिल नहीं होने के फैसले को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने ज्यादा तवज्जो नहीं देने की कोशिश की. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुलतान अहमद ने कहा, देखिए, किसी एक रैली में नहीं आने का मतलब यह नहीं है कि ममता जी और शाही इमाम के बीच कोई मतभेद है. शाही इमाम हमारी नेता की सादगी, नेतृत्व क्षमता और कार्यशैली को सराहते हैं. पार्टी और बुखारी के बीच अच्छे रिश्ते हैं.
