फिर पांव पसारने लगीं चिटफंड कंपनियां

कोलकाता: करीब एक वर्ष के अंतराल के बाद चिट फंड कंपनियां एक बार फिर यहां पांव पसारने लगी हैं. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में फिर से इन कंपनियों का कारोबार शुरू हो गया है. वे वहां के लोगों को बहला-फुसला कर रुपये ऐंठने लगी हैं. यह बातें सोमवार को राज्य के उपभोक्ता मामलों के मंत्री […]

कोलकाता: करीब एक वर्ष के अंतराल के बाद चिट फंड कंपनियां एक बार फिर यहां पांव पसारने लगी हैं. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में फिर से इन कंपनियों का कारोबार शुरू हो गया है. वे वहां के लोगों को बहला-फुसला कर रुपये ऐंठने लगी हैं. यह बातें सोमवार को राज्य के उपभोक्ता मामलों के मंत्री साधन पांडे ने कहीं.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से राज्य के विभिन्न जिलों से रिपोर्ट आयी हैं कि कई जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में चिटफंड कंपनियों ने फिर से कारोबार शुरू कर दिया है. इस संबंध में बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से उपभोक्ता विभाग के समक्ष शिकायतें दर्ज करायी गयी हैं.

विभिन्न जिलों से आयी रिपोर्ट को मुख्यमंत्री कार्यालय में भेज दिया गया है और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद ही उन सब के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. कुछ दिन पहले महानगर में चितपुर व बेलियाघाटा के साथ-साथ कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने चिटफंड कंपनियों के खिलाफ आंदोलन किया था. इनमें से कई पुरानी व कई नयी कंपनियां भी शामिल थीं. अब तक करीब 125 नयी शिकायतें विभाग को जमा करायी गयी हैं, जिनमें लोगों ने कंपनियों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है.

चिट फंड कंपनियों की राज्य सरकार ने कसी नकेल : मंत्री
पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल में सारधा चिटफंड कंपनी के घोटाले के बाद राज्य सरकार ने यहां की सभी चिटफंड कंपनियों की नकेल कसने का काम शुरू कर दिया था. सिर्फ सारधा में यहां के लाखों लोगों का 2000 करोड़ रुपये डूब गये हैं. 10 हजार रुपये से कम राशि का निवेश करनेवाले गरीब लोगों के लिए राज्य सरकार ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. उनके लिए नया आयोग गठन कर 500 करोड़ रुपये देने का लक्ष्य रखा है. अब तक राज्य सरकार ने करीब 3.2 लाख लोगों को मुआवजे की राशि प्रदान की है. राज्य सरकार ने यहां के सभी 17 लाख छोटे निवेशकों की राशि लौटाने का लक्ष्य रखी है.

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