अब्दुर रज्जाक मोल्ला माकपा से निष्कासित

कोलकाता: माकपा के बागी नेता और राज्य के पूर्व मंत्री अब्दुर रज्जक मोल्ला को ‘गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के लिए बुधवार को दल से निष्कासित कर दिया गया. मोल्ला ने पार्टी नेतृत्व को बार बार ‘अक्षम और निरंकुश’ बताया था. कई मौकों पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाया […]

कोलकाता: माकपा के बागी नेता और राज्य के पूर्व मंत्री अब्दुर रज्जक मोल्ला को ‘गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के लिए बुधवार को दल से निष्कासित कर दिया गया. मोल्ला ने पार्टी नेतृत्व को बार बार ‘अक्षम और निरंकुश’ बताया था. कई मौकों पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाया था.

माकपा के 1977 से लगातार विधायक रहे मोल्ला के पार्टी के निष्कासन की घोषणा करते हुए पार्टी की ओर से यहां जारी एक बयान में कहा गया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई ‘पार्टी विरोधी गंभीर गतिविधियों और जनता की नजर में पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए की गयी’.

बुद्धदेव भट्टाचार्य के आलोचक रहे हैं
माकपा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी ने मोल्ला को निष्कासित करने के लिए अपने संविधान के अनुच्छेद 19 (13) का इस्तेमाल किया. मोल्ला वाम मोरचा सरकार में भूमि एवं भूमि सुधार मंत्री थे. उन्हें निष्कासित करने का फैसला दिन में पार्टी की राज्य सचिवालयीय बैठक में किया गया. शेष पेज 9 पर

अब्दुर रज्जाक मोल्ला ..
पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की औद्योगिकी नीतियों सहित कई अन्य मुद्दों पर मतभेद रखने वाले मोल्ला ने पार्टी के निर्णय पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कहा, ‘मैं इस निर्णय का स्वागत करता हूं.’ दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मोल्ला और माकपा नेता तथा पूर्वी मिदनापुर जिले से पार्टी के सांसद लक्ष्मण सेठ ने गत रविवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखे हमले किये थे.

उन्होंने अल्पसंख्यकों और दलितों के लिए ‘सोशल जस्टिस फोरम’ का गठन किया है. उन्होंने कहा कि यह फोरम 2016 विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगा. मोल्ला ने नया संगठन बनाते समय राज्य को पहला दलित मुख्यमंत्री और मुसलिम उप मुख्यमंत्री देने का संकल्प लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि 34 वर्षो तक राज्य की सत्ता में रहने के बावजूद माकपा ने अल्पसंख्यकों और दलितों के विकास के लिए कुछ नहीं किया. साथ ही उन्होंने माकपा में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप भी लगाया था.

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