कोलकाता: पिछले महीने बागुइहाटी के एक घर से कस्टम विभाग द्वारा तीन चिंपांजी बरामद किये जाने के बाद यह सच्चई सामने आयी है कि कोलकाता जानवरों के अवैध कारोबार का मुख्य केंद्र बन चुका है. बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी तस्करी कर महानगर लाया जा रहे हैं और यहां से देश के अन्य शहरों में बेचे जाते हैं. पुलिस का कहना है कि विदेशी पक्षी व जानवरों की तस्करी के इस रैकेट को स्थानीय पक्षी व्यवसायी सहायता करते हैं.
गली-गली घूम कर पक्षी बेचनेवाले लोग ही इन विदेशी पक्षियों व जानवरों को देश के दूसरे शहरों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की तस्करी को रोकने काम उसका नहीं, बल्कि कस्टम एवं वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का है.
जानकारों के अनुसार,अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार लुप्तप्राय हो रहे जानवर सुंदरवन से शहर में पहुंचते हैं. सिंगापुर, म्यांमार एवं कुछ अफ्रीकी देशों से भी तस्करी कर यहां पक्षी लाये जाते हैं. वन्य प्राणी प्रेमी इन जानवरों व पक्षियों की मोटी कीमत चुकाते हैं. कानून के रखवालों के लिए इसका पता लगाना काफी कठिन होता है कि घरों में पाले जा रहे पक्षी व जानवर वैध अथवा अवैध तरीके से खरीदे गये हैं.
पशु प्रेमियों का मानना है कि पशुओं तस्करी के इस रैकेट को तबाह करने के लिए वन विभाग, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एवं पुलिस अधिकारियों को लेकर एक संयुक्त एक्शन कमेटी का गठन करना होगा.
