कब्र से निकाला गया शव

हावड़ा/: चोरी-छिपे 11 दिनों पहले कब्र में दफनायी गयी युवती का शव मंगलवार को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में बाहर निकाला गया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. अस्वाभाविक मौत के बाद पुलिस को जानकारी दिये बगैर शव क्यों दफनाया गया, पुलिस इसकी जांच कर रही है. घटना दासनगर थाना अंतर्गत धारसा के मल्लिक […]

हावड़ा/: चोरी-छिपे 11 दिनों पहले कब्र में दफनायी गयी युवती का शव मंगलवार को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में बाहर निकाला गया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. अस्वाभाविक मौत के बाद पुलिस को जानकारी दिये बगैर शव क्यों दफनाया गया, पुलिस इसकी जांच कर रही है. घटना दासनगर थाना अंतर्गत धारसा के मल्लिक पाड़ा इलाके की है. मृत युवती का नाम रानी खातून (19) है. उसने फांसी लगा कर खुदकुशी की थी.

कैसे हुई मौतडोमजूर स्थित आजाद कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्र थी रानी. आठ फरवरी को उसका शव उसी के कमरे में फंदे के सहारे झूलता मिला. घटना की सूचना मृतका की मां ने पिता मुबारक अली मल्लिक को दी. पिता ने खुद ही शव को नीचे उतारा. संयुक्त परिवार होने की वजह से निर्णय लिया गया कि मौत की खबर पुलिस को नहीं दी जायेगी. स्थानीय एक डॉक्टर से डेथ सर्टिफिकेट लेकर युवती के शव को वहीं के कब्रिस्तान में दफना दिया गया. इसकी भनक आसपास के लोगों तक को नहीं लगी.

पुलिस को मिली गोपनीय खबर
घटना के कुछ दिनों बाद पुलिस को गोपनीय सूचना मिली कि रानी खातून नामक एक छात्र की रहस्य मौत हुई है और पुलिस को सूचित किये बगैर शव को दफना दिया गया है. पुलिस ने इसकी सूचना एसडीओ (सदर) को दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ ने शव को कब्र से बाहर निकलवा कर उसका पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया. एसडीओ के निर्देशानुसार 176 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट व पुलिस की मौजूदगी में शव को कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. किस डॉक्टर ने डेथ सर्टिफिकेट जारी किया था, यह पूछे जाने पर पुलिस ने कहा कि यह जांच का विषय है.

अवसादग्रस्त थी बेटी : पिता
पिता मुबारक अली मल्लिक ने बताया कि उसकी बेटी अवसाद ग्रस्त थी. मेरे चारों भाई मेरी बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे. भाइयों को उसका कॉलेज जाना मंजूर नहीं था. इसी वजह से रानी को अपने चाचा-चाची का ताना सुनना पड़ता था. इससे तंग आकर उसने खुदकुशी की है. चूंकि, हमलोग पोस्टमार्टम व कानूनी कार्रवाई से बचना चाहते थे, इसलिए शव को चोरी-छिपे दफना दिया.

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