कोलकाता : भारत में 20 लाख लोगों में केवल एक व्यक्ति को ही अनुवांशिक मिलान के आधार पर रक्त स्टेम सेल दाता मिल पा रहा है और इस कारण एक वरिष्ठ रुधिरविज्ञानी का मानना है कि देश में ऐसा करने के इच्छुक लोगों का एक डेटाबेस बनाया जाये. रुधिर विज्ञानी और कोलकाता के टाटा चिकित्सा केंद्र के निदेशक डॉक्टर मेमन चांडी ने कहा, ‘आश्चर्यजनक रूप से हमारे देश में रक्तदान करने वालों को ढूंढना मुश्किल नहीं है लेकिन हम लोगों के पास पर्याप्त संख्या में रक्त स्टेम सेल दाता नहीं हैं.’ उन्होंने स्टेम कोशिका दान देने के इच्छुक लोगों के डेटाबेस पर बल देते हुए कहा कि खून के कैंसर और अस्थि मज्जा फेल्योर से ग्रस्त मरीजों को इससे काफी राहत मिल सकती है.
उन्होंने कहा कि अनुवांशिकी के मिलान के बाद स्टेम सेल प्रत्यारोपण के माध्यम से ऐसे मरीजों की जान तक बचायी जा सकती है. डॉक्टर चांडी ने कहा ‘इसलिए, भारत को हमारे रजिस्टरी में दाताओं की संख्या बढाने की जरुरत है.’ रक्त स्टेम सेल प्रत्यर्पण से ल्यूकीमिया, थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रक्त विकारों को दूर किया जा सकता है. रुधिरविज्ञानी ने बताया कि केरल में रक्त स्टेम सेल दाताओं की संख्या 19,000 से अधिक है. तामिलनाडु में 16,000 से अधिक जबकि कर्नाटक में दाताओं की संख्या 10,000 से अधिक है. वहीं पश्चिम बंगाल में यह संख्या महज 2,369 है जो राज्य की जनसंख्या की तुलना में काफी कम है. डॉक्टर चांडी ने कहा कि इस बाबत लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है.
