कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस से निलंबित सांसद कुणाल घोष ने सारधा चिटफंड घोटाले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य के खिलाफ कदम उठाने तथा राज्यसभा की कार्यवाही में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत तथा पेरोल का आज आग्रह किया जिसे नगर की एक अदालत ने ठुकरा दिया.
घोष को जब चिटफंड घोटाले के संबंध में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रुद्रप्रसाद राय की अदालत में पेश किया गया तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आज से उस वक्त तक के लिए आमरण अनशन शुरु किया है जब तक उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने सारदा ग्रुप का उपयोग किया है. मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा की कार्रवाई में शरीक होने हेतु अंतरिम जमानत के लिए अदालत के समक्ष आग्रह करते हुए घोष ने कहा कि ममता और अन्य के खिलाफ कदम उठाए जाएं जिन्होंने उसका उपयोग किया था.
घोष ने आग्रह किया कि उन्हें 20 घंटे के लिए जमानत प्रदान की जाए ताकि वह राज्यसभा में पेश हो सकें. इससे पहले भी घोष ने अदालती कार्यवाहियों में कहा था कि सीबीआई उनके साथ ममता से भी पूछताछ करे. बाद में, घोष ने यह दावा करते हुए न्यायाधीश शुभ्र घोष की अदालत में पेरोल की याचिका दायर की कि राज्यसभा अधिकारियों से उन्हें एक नोटिस मिला है जिसमें उन्हें कल संसद में उपस्थित होने के लिये कहा गया है.
न्यायाधीश ने उनकी पेरोल याचिका खारिज कर दी. उधर, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अंतरिम जमानत की उनकी याचिका खारिज कर दी और उनकी न्यायिक हिरासत तीन अगस्त तक के लिए बढ़ा दी.
