पैर जमाने की कोशिश में सपा व बसपा

कोलकाता: उत्तर प्रदेश को भारतीय राजनीति का केंद्र माना जाता है. कभी कांग्रेस व भाजपा का गढ़ रहे उत्तर प्रदेश में अब मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) व मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का डंका बज रहा है. दोनों प्रतिद्वंद्वी दल अब उत्तर प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल में अपने […]

कोलकाता: उत्तर प्रदेश को भारतीय राजनीति का केंद्र माना जाता है. कभी कांग्रेस व भाजपा का गढ़ रहे उत्तर प्रदेश में अब मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) व मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का डंका बज रहा है. दोनों प्रतिद्वंद्वी दल अब उत्तर प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल में अपने पैर जमाने की कोशिश करने लगे हैं.

राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ जमाने के लिए दोनों दलों ने पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. सपा व बसपा का यह पासा कितना कामयाब रहेगा, यह तो सोमवार को ही पता चलेगा, जब पंचायत चुनाव के परिणाम सामने आयेंगे. दोनों दलों को उम्मीद है कि मुलायम सिंह यादव व मायावती के नाम पर चुनाव में उन्हें अच्छी-खासी सीटें मिलेंगी. बसपा ने 600 से अधिक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. सपा व बसपा को विशेष रूप से उत्तर व दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली व बर्दवान जिलों में अच्छे परिणाम सामने आने की उम्मीद है. वैसे राज्य में बसपा के मुकाबले सपा की राजनीतिक स्थिति थोड़ी बेहतर है. मुशिर्दाबाद के भगवानगोल से समाजवादी पार्टी के खाते में चांद मोहम्मद के रूप में एक विधायक भी है, वहीं किरणमय नंदा के रूप में एक परिचित राजनीतिक चेहरा वर्षो से मौजूद है.

2008 के पंचायत चुनाव सपा, माकपा के साथ मिल कर लड़ी थी, लेकिन इस बार मुलायम सिंह के दल ने अकेले ही किस्मत आजमायी है. इस बार सपा ने इस पंचायत चुनाव में 1500 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. बसपा के मुकाबले सपा ने मुर्शिदाबाद, हुगली, हावड़ा, कूचबिहार व पूर्व मेदिनीपुर जिलों पर अपना ध्यान केंद्रित किया था. पार्टी ने राज्य के बड़े राजनीतिक दलों के बागियों को भी बड़ी संख्या में टिकट दिया है. सपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा ने बताया कि इस बार हम लोगों ने अकेले ही चुनाव लड़ा है और उम्मीद है कि परिणाम अच्छा होगा.

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