फाइलें गोपनीय रखने का फैसला बरकरार
कोलकाता : केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने प्रधानमंत्री कार्यालय की उस दलील को स्वीकार किया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्नी और पुत्री के बारे में गोपनीय फाइल जारी करने से दूसरे देशों से संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है. मुख्य सूचना आयुक्त राजीव माथुर ने शोधकर्ता चंद्रचूड़ घोष की अपील का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के उस निर्णय को चुनौती दी गयी थी जिसमें नेताजी की पत्नी और पुत्री की ओर से सरकार को लिखे गये पत्रों तक पहुंच सुलभ नहीं कराने का निर्णय किया गया था.
सीआइसी ने अपने निर्णय में कहा है कि उपरोक्त बातों और सीपीआइओ की पूरी प्रक्रिया का पालन करने की दलीलों पर विचार करने के बाद हम सीपीआइओ/एए के सूचना जारी करने से इनकार करने के निर्णय को बरकरार रखते हैं. 2013 में पीएमओ ने इन फाइलों के बारे में कहा था कि नेताजी से संबंधित तीन फाइलें क्लासीफाइड हैं और इन्हें प्रकाश में लाने से दूसरे देशों के साथ हमारे संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी लिख रहे चंद्रचूड़ घोष का कहना है कि इन फाइलों को राज में रखने से साजिश की बू आयेगी.
