कोलकाता: करीब 10 वर्ष पहले शुरू हुए विशेष फंड को फिर से शुरू करके चाय, कॉफी व रबर उद्योग की सहायता के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशों को शुरू कर दिया गया है. टी बोर्ड के चेयरमैन सिद्धार्थ ने इसकी जानकारी दी.
कलकत्ता टी ट्रेडर्स एसोसिएशन (सीटीटीए) की 118वीं वार्षिक आम बैठक में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सिद्धार्थ ने कहा कि प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को तीन वर्ष पहले शुरू किया गया था. उस वक्त इसके नियम व शर्ते कड़े थे. कीमतों में 20 फीसदी की गिरावट होने पर पिछले सात वर्ष की औसत कीमत के आधार पर मदद की जाती थी. लेकिन अब कीमतों में 10 फीसदी की कमी होने पर ही मदद की जायेगी. सात की बजाय पांच वर्ष की औसत कीमत देखी जायेगी. इसे फिर से शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से दरख्वास्त की जा रही है.
बैठक में सीटीटीए के विदा होने वाले चेयरमैन एलएन गुप्ता ने कहा कि इस वर्ष जनवरी से मई तक की अवधि में चाय के उत्पादन में करीब 30 मिलियन किलो की कमी आयी है. गत वर्ष की इस अवधि के 266.45 मिलियन किलो की तुलना में इस वर्ष जनवरी से मई तक उत्पादन 236.51 मिलियन किलो हुआ है. इंडियन टी एसोसिएशन के चेयरमैन अरुण सिंह ने कहा कि मौसम परिवर्तन के कारण समस्याएं हो रही हैं. जून में भी चाय का उत्पादन सामान्य से 15 फीसदी कम रहेगा. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में चाय श्रमिकों का वेतन बढ़ाया जाना है. असम में भी अगले छह महीने के भीतर वेतन बढ़ाये जायेंगे. हालांकि देश के वर्तमान प्रधानमंत्री के चाय के साथ जुड़े रहने के कारण आशा है कि चाय उद्योग पर सरकार ध्यान देगी. एसोसिएशन एक स्टेटस पेपर बनाने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है.
