बंगाल चुनाव 2026: मतुआ वोट बैंक में सेंध लगा पायेगी भाजपा? SIR ने बढ़ायी बेचैनी

SIR Voter List Bengal: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 विश्लेषण: नदिया और उत्तर 24 परगना में मतुआ समुदाय के लाखों नाम मतदाता सूची से गायब. नागरिकता के वादे पर घिरी भाजपा. क्या टीएमसी की ओर मुड़ेंगे शरणार्थी वोटर्स?

SIR Voter List Bengal: बंगाल चुनाव 2026 के बीच शरणार्थी मतुआ समुदाय का राजनीतिक मिजाज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गया है. वर्षों से जिस नागरिकता के वादे पर भाजपा ने मतुआ समुदाय को अपना मजबूत आधार बनाया था, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम सूची ने उसी वादे पर सवालिया निशान लगा दिया है. नदिया और उत्तर 24 परगना के मतुआ बहुल इलाकों से लाखों लोगों के नाम हटने के बाद अब भाजपा का ‘गढ़’ डगमगाता नजर आ रहा है.

नागरिकता का वादा और वोटर लिस्ट का झटका

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ही भाजपा ने सीएए (CAA) के जरिये मतुआ और नामशूद्र समुदाय को नागरिकता की अनिश्चितता खत्म करने का भरोसा दिया था. अब स्थिति इसके उलट है. बनगांव, बागदा, गायघाटा और रानाघाट जैसे क्षेत्रों में हजारों मतदाता पूछ रहे हैं कि वर्षों तक भाजपा का साथ देने के बाद भी उन्हें अपना अस्तित्व बचाने के लिए कतारों में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है?

ग्राउंड रिपोर्ट : भाजपा के प्रति नाराजगी और घर वापसी

मतुआ मतदाताओं के बीच उपजा आक्रोश अब जमीन पर दिखने लगा है. गायघाटा के अशोक मंडल जैसे कई लोग कह रहे हैं कि नागरिकता के वादे पर वोट देने के बाद अब उनका वोट देने का अधिकार ही छिन गया है. बागदा के बोयरा गांव में करीब 50 मतुआ परिवारों ने सूची से नाम गायब होने के बाद भाजपा का दामन छोड़ तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करने का फैसला किया है. बंगाल की 55 विधानसभा सीटों पर मतुआ वोट बैंक निर्णायक है. 2021 में भाजपा की 77 सीटों में से बड़ी संख्या इन्हीं क्षेत्रों से आयी थी.

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SIR Voter List Bengal: सबसे ज्यादा प्रभावित हुए आरक्षित क्षेत्र

अंतिम मतदाता सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर 24 परगना में 12.3 लाख से अधिक नाम हटाये गये हैं. इनमें सबसे ज्यादा बनगांव उपखंड और नदिया जिले प्रभावित हुए हैं. अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित क्षेत्रों में ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, जिसका सीधा असर मतुआ और नामशूद्र समुदायों पर पड़ा है.

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भाजपा का डैमेज कंट्रोल और ममता बनर्जी का हमला

इस असहज स्थिति को देखते हुए भाजपा के स्थानीय नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गये हैं. पार्टी का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है. कटे हुए नाम दोबारा बहाल किये जायेंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है. उन्होंने भाजपा पर शरणार्थियों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए घेराबंदी शुरू कर दी है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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