मुख्य बातें
Supreme Court : कोलकाता/ नई दिल्ली. बंगाल में वोट देने के अधिकार से वंचित लोगों की उम्मीद कायम है. ट्रिब्यूनल का फैसला ही क्या अंतिम फैसला होगा. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा निपटाए गए मामलों के मतदाताओं को मतदान करने की अनुमति मिलेगी या नहीं, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट 13 अप्रैल को एसआईआर की सुनवाई में फैसला करेगा. इसके बाद न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा- हम 13 तारीख को मतदाता सूची पर रोक लगाने के मुद्दे पर विचार करेंगे.
नहीं किया जा रहा स्थायी रूप से वंचित
आयोग के वकील डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची को अंतिम रूप 9 तारीख को दिया गया था. उसके बाद इस मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता. हालांकि, मतदान का अधिकार निश्चित रूप से मौजूद है. न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा- हम व्यापक परिप्रेक्ष्य पर विचार कर रहे हैं. चुनाव के लिए एक अंतिम तिथि निर्धारित है और इसके अलावा, एक संवैधानिक अधिकार भी है, जो मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने और अगले चुनाव में मतदान करने का है. यह कहीं अधिक स्थायी और व्यापक मुद्दा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- आपको स्थायी रूप से वंचित नहीं किया जा रहा है.
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हर दिन हो रहा याचिका दायर
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि ये सभी याचिकाकर्ता पासपोर्ट धारक हैं. तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा- हम कोई वादा नहीं कर सकते. प्रतिदिन मामले दर्ज किए जा रहे हैं. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा- हम मजबूरी में मामले दर्ज कर रहे हैं. जिस प्रकार से दस्तावेज होने के बावजूद नाम काटे जा रहे हैं, ऐसे में यह करना मजबूरी है. इसपर पीठ ने कहा कि इसपर 13 को बात करते हैं. अब देखते हैं कि 13 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय क्या आदेश देता है. उस दिन सर्वोच्च न्यायालय यह फैसला सुनाएगा कि न्यायाधिकरण में गठित मतदाताओं को इस बार मतदान करने की अनुमति दी जाएगी या नहीं.
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