कोलकाता: करोड़ों रुपये के सारधा चिट फंड घोटाले के मुख्य सरगना सुदीप्त सेन, उसकी अहम साथी देवजानी मुखर्जी एवं तृणमूल के निलंबित राज्यसभा सांसद कुणाल घोष को अदालत ने फिर से तीन दिनों की सीबीआइ हिरासत में भेज दिया है.
सुदीप्त सेन, कुणाल घोष, देवजानी मुखर्जी, मनोज नगेल, सोमनाथ दत्ता एवं अरविंद सिंह चौहान 16 जून से ही सीबीआइ की हिरासत में थे, जिसकी मियाद सोमवार को समाप्त हो गयी थी. सोमवार को सीबीआइ ने सारधा घोटाले में गिरफ्तार सभी छह आरोपियों को अलीपुर कोर्ट में पेश किया. मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सुदीप्त सेन, कुणाल घोष व देवजानी मुखर्जी को गुरुवार अर्थात 26 जून तक सीबीआइ की हिरासत में भेजने का निर्देश दिया, जबकि तीन अन्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश दिया.
आरोपियों के वकील अनिर्वान गुहा ठाकुरता ने बताया कि एडिशनल चीफ न्यायिक मजिस्ट्रेट हाराधन मुखोपाध्याय ने सुदीप्त सेन, कुणाल घोष एवं देवजानी मुखर्जी की सीबीआइ हिरासत की मियाद 26 जून तक बढ़ा दी है, जबकि बाकी तीन आरोपी 7 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे. अदालत में पेश किये जाने के दौरान निलंबित सांसद कुणाल घोष ने सीबीआइ की जांच पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस बहुचर्चित घोटाले के बारे में बताने के लिए उनके पास काफी कुछ है और मुङो खुशी है कि मैं सीबीआइ को ऐसी जानकारियां उपलब्ध करा सकता हूं कि उन्हें इससे जांच में मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि श्री घोष काफी दिनों से यह आरोप लगा रहे हैं कि सारधा घोटाले में न केवल तृणमूल के कई आला नेताओं का हाथ है, बल्कि स्वयं मुख्यमंत्री को भी इसकी जानकारी थी. वह ईडी को पत्र लिख कर अपनी जान पर खतरे की आशंका भी व्यक्त कर चुके हैं.
