कोलकाता : केंद्रीय जांच एजेंसियों ने नागेरबाजार विस्फोट मामले में तथ्यों को छिपाये जाने की आशंका जतायी है. सूत्रों के अनुसार, विस्फोट के बाद घटनास्थल पर चलाये गये सफाई अभियान को लेकर ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है. हालांकि इस मामले की जांच में जुटे अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.
उधर, वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बसु ने विस्फोट कांड के बाद घटनास्थल पर फैले खून के दाग धोये जाने को लेकर सवाल उठाये हैं. उन्होंने सवाल किया कि फॉरेंसिक टीम के पहुंचने से पहले घटनास्थल की साफ-सफाई की बात सामने आयी थी, आखिर इसकी क्या वजह थी? यदि ऐसा हुआ, तो ऐसा किसने और क्यों किया? वामपंथी नेता ने आरोप लगाया कि राज्य में कई घटनाएं घटी हैं, जहां ऐसी बातें सामने आयी हैं.
उन्होंने नागेरबाजार विस्फोट कांड की सही जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. गौरतलब है कि दमदम थाना क्षेत्र के नागेरबाजार के काजीपाड़ा में मंगलवार की सुबह आइइडी विस्फोट में सात साल के विभाष घोष की मौत हो गयी थी. विभाष की मां समेत 10 लोग जख्मी हैं. इस धमाके के बाद बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गये. यही नहीं, खून के धब्बों को जल्द ही धो दिया गया. इसे लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं.
सीआइडी को सौंपी जांच
कोलकाता. नागेरबाजार के काजीपाड़ा इलाके मेें हुए विस्फोट की जांच का जिम्मा सीआइडी को सौंपा गया है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी सीआइडी को सौंपी गयी है. इधर, विस्फोट के संबंध में स्वत: संज्ञान लेते हुए बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. विस्फोट में किसी आतंकी संगठन का हाथ है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है. 2014 में बर्दवान के खागड़ागढ़ में धमाका हुआ था, जिसमें आतंकी संगठन जेएमबी का हाथ सामने आया था.
