कोर्ट का फरमान: राज्य सरकार की हठधर्मिता को सुप्रीम कोर्ट का करारा झटका

नयी दिल्ली/कोलकाता: सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्र वार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सारधा चिट फंड घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) करेगी. कोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. कोर्ट ने सीबीआइ को ओड़िशा में पोंजी स्कीम घोटाले की […]

नयी दिल्ली/कोलकाता: सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्र वार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सारधा चिट फंड घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) करेगी. कोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. कोर्ट ने सीबीआइ को ओड़िशा में पोंजी स्कीम घोटाले की जांच भी करने के लिए कहा है.

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने कहा कि इस घोटाले के अंतरराज्यीय आयाम हैं. न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय को भी निर्देश दिया कि आरोपी कंपनियों के खिलाफ जांच तत्परता से की जाये, लेकिन न्यायालय ने सीबीआइ की जांच की निगरानी के लिए फिलहाल कोई समिति गठित करने से इनकार कर दिया. अदालत ने इन मामलों की जांच राज्य सरकारों की जांच एजेंसियों के हाथ से ले कर इन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया. साथ ही राज्य सरकार के प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जांच ब्यूरो की जांच में सहयोग करें. सारा विवरण मुहैया करायें.

राज्य पुलिस की जांच पर कोर्ट ने जतायी नाराजगी : कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले की पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से हो रही जांच में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है. कोर्ट ने सीबीआइ से चिट फंड घोटाले में धन की हेराफेरी की जांच करने के लिए भी कहा. शीर्ष अदालत ने देश में चिटफंट के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने और निवेशकों से और धन एकत्र करने से उन्हें रोकने के लिए दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पुलिस में उनका कोई विश्वास नहीं है.

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