जीटीए का भविष्य ममता के हाथ में

गुरुंग ने पहाड़ में बंद की राजनीति से किया तौबा, कहा संगठन बढ़ाने पर जोर पंचायत चुनाव शीघ्र कराने की मांग सिलीगुड़ी : लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का भविष्य राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तय करेंगी. हमलोग पहाड़ पर जीटीए को ठीक तरह से चलाना चाहते हैं, लेकिन इस काम […]

गुरुंग ने पहाड़ में बंद की राजनीति से किया तौबा, कहा

संगठन बढ़ाने पर जोर

पंचायत चुनाव शीघ्र कराने की मांग

सिलीगुड़ी : लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का भविष्य राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तय करेंगी. हमलोग पहाड़ पर जीटीए को ठीक तरह से चलाना चाहते हैं, लेकिन इस काम में मुख्यमंत्री कितना सहयोग करेंगी, इसका अंदाजा हमलोगों को नहीं है. ऐसा मानना है जीटीए चीफ तथा गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग का. वह रविवार को सिलीगुड़ी में अपनी पार्टी के पदाधिकारियों एवं समर्थकों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

श्री गुरुंग ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एसएस अहलूवालिया का समर्थन किया है. ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बाइचुंग भुटिया के समर्थन की अपील उनसे की थी, लेकिन अलग राज्य के भविष्य को देखते हुए उन्होंने तथा उनकी पार्टी ने भाजपा उम्मीदवार का समर्थन किया. इस वजह से ममता बनर्जी के साथ उनके संबंध अब अच्छे नहीं हैं. चुनाव परिणाम के बाद जीटीए को आगे चलाना या नहीं चलाना ये सबकुछ अब ममता बनर्जी के हाथों में ही है.

श्री गुरुंग ने ममता की ओलाचना करते हुए कहा कि पहाड़ के लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थीं. ममता बनर्जी जब पहाड़ पर आयी थीं, तो उन्होंने उनको मां का दर्जा दिया था, लेकिन उन्होंने इसका मान नहीं रखा और पहाड़ के लोगों को बांटने तथा उनकी तकलीफों को बढ़ाने में ज्यादा जुटी रहीं. श्री गुरुंग ने कहा कि ममता बनर्जी पिछले कुछ वर्षो में 23 बार पहाड़ पर आ चुकी हैं, लेकिन इस दौरान पहाड़ पर विकास का एक भी काम नहीं हुआ, वह जब भी पहाड़ पर आयीं यहां के लोगों को उससे तकलीफ ही हुई है. उन्होंने अलग राज्य की मांग के आंदोलन को कुचलने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपनाये. जिससे पहाड़ के लोगों को तकलीफ हुई है. विमल गुरुंग ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बदले की कार्रवाई कर रही हैं.

उन्होंने पूर्ववर्ती वाममोरचा सरकार को ममता बनर्जी की सरकार से अच्छा बताते हुए कहा कि वाम मोरचा सरकार ने भले ही अलग राज्य के गठन की मांग का विरोध किया, लेकिन कभी भी इस तरह की दमन नीति को बढ़ावा नहीं दिया. खुद पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य पहाड़ पर आंदोलन चलने के क्रम में कभी भी यहां नहीं आयें. उन्होंने आंदोलन की दमन की कभी नहीं सोची.

श्री गुरुंग ने कहा कि अब हम लोग अलग राज्य के लिए आंदोलन तो करेंगे, लेकिन बंद की राजनीति नहीं करेंगे. उन्होंने आने वाले दिनों में पहाड़ पर किसी भी प्रकार के बंद बुलाने से भी साफ इनकार किया. श्री गुरुंग ने लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग संसदीय क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलूवालिया की जीत की उम्मीद जाहिर करते हुए पहाड़ पर मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया. श्री गुरुंग ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने मतदान के दौरान गड़बड़ी के जो आरोप लगाये हैं, उसका कोई आधार नहीं है.

ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा कि पूरे पहाड़ पर मतदान का काम सीआरपीएफ की देखरेख में हुआ. ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी किये जाने की बात कहना सही नहीं होगा. इसके साथ ही उन्होंने दार्जिलिंग जिले में पंचायत चुनाव शीघ्र कराने की मांग की. श्री गुरुंग ने पंचायत चुनाव को देखते हुए गोजमुमो के संगठन में विस्तार पर भी जोर दिया. उन्होंने रविवार को पार्टी के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक की और संगठन को मजबूत करने पर बल दिया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >