कोलकाता: मध्यमग्राम व कामदुनी सामूहिक दुष्कर्म कांड को लेकर बीते वर्ष बारासात लोकसभा क्षेत्र सुर्खियों में रहा. इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को आड़े हाथ लिया. राज्य सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा.
अब लोगों की नजर इस लोकसभा सीट पर होने वाले चुनाव की है. लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के तहत बारासात सीट पर होने वाला चुनाव किसी भी दल के लिए आसान नहीं दिख रहा है. विगत चुनाव में लड़ाई मुख्य रूप से वाम मोरचा, भाजपा व कांग्रेस से गंठबंधन करनेवाली तृणमूल कांग्रेस के बीच था. इसमें भारी वोटों से तृणमूल प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार तृणमूल कांग्रेस व कांग्रेस साथ नहीं है. देश में कथित तौर पर चल रही नरेंद्र मोदी की हवा में भाजपा को भी महत्वपूर्ण फैक्टर माना जा रहा है.
इधर, राज्य में वाम दुर्ग के ढहने के पहले तक फॉरवर्ड की पकड़ इलाके में लंबे समय तक रही है. चतुमरुखी लड़ाई के बीच अपनी पैठ फिर से जमाने की कोशिश फॉरवर्ड ब्लॉक की प्राथमिकता रहेगी. बारासात में ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा है. यहां की कुल जनसंख्या का बड़ा वर्ग कृषि पर निर्भर है. हालांकि बारासात इलाका व्यापारिक केंद्र में भी उभर रहा है. ऐसे में श्रमिकों, ग्रामीण लोगों व किसानों की समस्याएं काफी प्रमुख हैं. अत: किसी भी दल के लिए इन्हें अलग रख चुनाव की तैयारी संभव नजर नहीं आती. सबकी नजर यहां होनेवाले चुनाव पर है, ताकि पता चले कि बार यहां चुनाव में किस दल का जादू चलेगा.
