योगी Vs अखिलेश: UP में दुष्कर्म के मामलों का NCRB हिसाब चौंकाने वाला, किसके राज में ज्यादा केस

UP Crime: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर बहस होती है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ सरकारों के कार्यकाल में दुष्कर्म के मामलों की तुलना एक अलग तस्वीर पेश करती है. यह विश्लेषण दोनों सरकारों के दौरान दर्ज मामलों की संख्या और औसत पर प्रकाश डालता है.

UP Crime: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर सियासी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं. ऐसे में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के आधार पर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ सरकार के दौर में दर्ज दुष्कर्म के मामलों की तुलना करें तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. तुलना के लिए अखिलेश यादव के कार्यकाल के पूरे कैलेंडर वर्ष 2012 से 2016 और योगी आदित्यनाथ सरकार के 2018 से 2024 तक के पूरे कैलेंडर वर्षों को लिया गया है. वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन होने के कारण उसे अलग रखा गया है.

अखिलेश सरकार के पांच साल में 16,321 दुष्कर्म के मामले

NCRB के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में यूपी में दुष्कर्म के 1,963 मामले दर्ज हुए. 2013 में यह संख्या बढ़कर 3,050, 2014 में 3,467, 2015 में 3,025 और 2016 में 4,816 हो गई. इस तरह 2012 से 2016 के बीच कुल 16,321 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए. पांच वर्षों का औसत निकालें तो हर साल करीब 3,264 मामले सामने आए.

योगी सरकार के सात पूरे वर्षों में 23,058 दुष्कर्म के मामले

योगी आदित्यनाथ सरकार के पूरे कैलेंडर वर्षों की बात करें तो 2018 में उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म के 3,964 मामले दर्ज हुए. 2019 में यह संख्या 3,065, 2020 में 2,769, 2021 में 2,845, 2022 में 3,690, 2023 में 3,516 और 2024 में 3,209 रही. इन सात वर्षों में कुल 23,058 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए. सात साल का औसत करीब 3,294 मामले प्रतिवर्ष रहा.

औसत में कितना अंतर?

दोनों सरकारों के बीच तुलना में वार्षिक औसत ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों अवधियों की अवधि समान नहीं है.

अखिलेश यादव सरकार (2012-16) कुल मामले: 16,321 वार्षिक औसत: 3,264

योगी आदित्यनाथ सरकार (2018-24) कुल मामले: 23,058 वार्षिक औसत: 3,294

यानी पूरे कैलेंडर वर्षों के औसत की तुलना में योगी सरकार के दौर में प्रति वर्ष करीब 30 दुष्कर्म के मामले अधिक दर्ज हुए. प्रतिशत के लिहाज से यह अंतर लगभग 0.9 प्रतिशत बैठता है.

2017 को तुलना से बाहर रखने की वजह

2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता बदली थी. अखिलेश यादव की सरकार के बाद मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने. ऐसे में पूरे 2017 के NCRB आंकड़ों को किसी एक सरकार के खाते में रखना उचित नहीं होगा. इसलिए दोनों सरकारों के पूरे कैलेंडर वर्षों को अलग-अलग रखकर तुलना की गई है.

सबसे ज्यादा दुष्कर्म के मामले किस साल दर्ज हुए?

इस तुलना में अखिलेश सरकार के दौरान 2016 में 4,816 मामले दर्ज हुए, जो दोनों अवधियों में सबसे अधिक है.

योगी सरकार के दौर में सबसे ज्यादा मामले 2018 में 3,964 दर्ज हुए. इसके बाद 2019 और 2020 में आंकड़े नीचे आए. 2022 में फिर 3,690 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 3,209 रह गई.

क्या इन आंकड़ों से किसी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

सिर्फ FIR की संख्या के आधार पर किसी सरकार को महिला अपराध के मामले में बेहतर या खराब घोषित करना सावधानी के बिना सही नहीं होगा. NCRB के आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों को दर्शाते हैं. दर्ज मामलों की संख्या पर रिपोर्टिंग, FIR दर्ज करने की प्रक्रिया, पुलिस व्यवस्था और लोगों की शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ सकता है. इस तुलना से इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2012-16 और 2018-24 के पूरे कैलेंडर वर्षों के औसत में दर्ज दुष्कर्म के मामलों की संख्या योगी सरकार के दौर में मामूली रूप से अधिक रही. हालांकि अंतर करीब 0.9 प्रतिशत है, इसलिए इसे बहुत बड़ा अंतर बताना आंकड़ों के साथ न्याय नहीं होगा.

आंकड़ों में पूरी तस्वीर

अखिलेश यादव सरकार: 2012-16 → 16,321 मामले, औसत 3,264 प्रति वर्ष

योगी आदित्यनाथ सरकार: 2018-24 → 23,058 मामले, औसत 3,294 प्रति वर्ष

औसत अंतर: करीब 30 मामले प्रति वर्ष, यानी लगभग 0.9 प्रतिशत

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लेखक के बारे में

By तिलक कुमार

तिलक कुमार पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है. अमर उजाला, प्रभात खबर, जनसंदेश टाइम्स और राष्ट्रीय सहारा जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं. अपराध, राजनीति और हाइपरलोकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. मैदानी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खबरों को पाठकों तक पहुंचाया है. जमीनी मुद्दों की गहरी समझ और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग उनकी पहचान रही है. वर्तमान में वह प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़े हुए हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

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