Varanasi Art and Culture: बनारस की गलियां, घाट और उसकी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत जल्द ही एक बड़े वैश्विक कला मंच का हिस्सा बन सकती है. 27 नवंबर से 31 दिसंबर तक प्रस्तावित काशी बिएनाले में देश-विदेश की कला, संस्कृति और उद्योग जगत की हस्तियां जुटेंगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को निमंत्रण भेजा गया है. खास बात यह है कि बिएनाले किसी एक जगह तक सीमित नहीं होगा. पूरा बनारस इसकी कला-भूमि बनेगा.
काशी को महसूस करेगा दुनिया
‘काशी लाइट- सिटी एज सेंसरियम’ थीम पर प्रस्तावित बिएनाले काशी को एक अलग अंदाज में दुनिया के सामने रखने की तैयारी है. यहां शहर को सिर्फ देखने का अनुभव नहीं होगा. कला, संगीत, शिल्प, स्वाद, ध्वनि और स्मृतियों के जरिए काशी को महसूस कराया जाएगा. पेरिस में होने वाले बिएनाले की तर्ज पर इसे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच के रूप में विकसित करने की योजना है.
कई जगहों पर दिखेगी कला
बीएचयू, भारत कला भवन, ज्ञान प्रवाह, नमो घाट और तुलसी घाट आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे. भारत कला भवन में चित्रकला, मूर्तिकला और छायाचित्रों की प्रदर्शनियां प्रस्तावित हैं. वीडियो, पांडुलिपियों और बनारसी वस्त्रों को भी इसमें खास जगह मिलेगी. यानी दर्शक एक स्थल से दूसरे स्थल तक जाते हुए काशी की कला और विरासत के अलग-अलग रंग देख सकेंगे.
दुनिया से जुड़ेगा बनारस
बिएनाले में इटली, स्पेन, अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों से कला, संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े प्रतिनिधियों को बुलाने की तैयारी है. भारतीय उद्योग जगत के लोगों को भी इससे जोड़ा जाएगा. सीआईआई के मुताबिक इससे संस्कृति, पर्यटन, शिल्प, डिजाइन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावनाएं बन सकती हैं. करीब एक हजार उद्यमियों को जोड़ने की तैयारी है, जिसमें देश के शीर्ष 100 उद्यमी भी शामिल होंगे.
एक आयोजन से आगे की तैयारी
काशी बिएनाले को सिर्फ एक बार होने वाला सांस्कृतिक आयोजन बनाने की योजना नहीं है. सीआईआई के हर्षित पांडेय के अनुसार इसे आगे चलकर एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्था के रूप में विकसित करने की तैयारी है. अगर योजना इसी दिशा में आगे बढ़ती है, तो काशी का यह मंच कला और उद्योग के साथ दुनिया के सांस्कृतिक संवाद का स्थायी केंद्र बन सकता है.
