UPESSC भर्ती पर ब्रेक: असिस्टेंट प्रोफेसर व प्रधानाध्यापक के अधियाचन लौटे, अर्हता और पद सृजन पर उठे सवाल

UP News: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने असिस्टेंट प्रोफेसर (कुक्कुट पालन) और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य के पदों पर भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन को आपत्तियों के साथ लौटा दिया है. पद सृजन और शैक्षिक अर्हता में स्पष्टता न होने से भर्ती प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है.

प्रयागराज उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने असिस्टेंट प्रोफेसर कुक्कुट पालन विषय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्य भर्ती से जुड़े अधियाचन आपत्तियों के साथ वापस कर दिए हैं. आयोग ने कुक्कुट पालन विषय में पद सृजन न होने और माध्यमिक भर्ती में शैक्षिक अर्हता स्पष्ट न होने को गंभीर खामी माना है. इन आपत्तियों के कारण दोनों भर्तियों की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकेगी. कुक्कुट पालन विषय में पद सृजन न होने और प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य भर्ती में शैक्षिक अर्हता स्पष्ट न होने पर आयोग ने अधियाचन वापस भेजे, भर्ती प्रक्रिया फिलहाल अटकी.

उच्च शिक्षा भर्ती में पद सृजन पर आपत्ति

उच्च शिक्षा निदेशालय ने 111 प्राचार्य और 44 विषयों में 2107 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों का अधियाचन आयोग को भेजा था. परीक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों ने पाया कि कुक्कुट पालन विषय के अधियाचन गोरखपुर और गाजीपुर के महाविद्यालयों से भेजे गए, जबकि संबंधित पद पशुपालन एवं दुग्ध विभाग से जुड़े थे. पद सृजन न होने के कारण आयोग ने अधियाचन वापस कर दिया.

एलाइड सब्जेक्ट तय करने के लिए बनेगी समिति

आयोग के उप सचिव संजय सिंह ने बताया कि अधियाचन आपत्तियों के साथ निदेशालय को लौटा दिए गए हैं. इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सह विषय (एलाइड सब्जेक्ट) के निर्धारण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है. सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि समिति में शासन, निदेशालय, आयोग और विषय विशेषज्ञों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो पात्रता संबंधी विवादों का समाधान करेंगे.

2643 प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य पदों पर भी रोक

आयोग ने एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के 2643 पदों के अधियाचन पर भी आपत्ति जताई है. आयोग का कहना है कि इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षिक अर्हता, डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है. अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक कामता राम पाल ने कहा कि सभी आपत्तियों का समाधान कर संशोधित अधियाचन दोबारा भेजा जाएगा.

नियम 22 में संशोधन का पहले ही दिया गया था प्रस्ताव

चयन आयोग के सचिव ने जून में प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर चयन आयोग नियमावली-2023 के नियम 22 में संशोधन का प्रस्ताव भेजा था. इसमें प्राचार्य, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों के लिए शैक्षिक अर्हता, आरक्षण और अधियाचन प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की संस्तुति की गई थी. आयोग का मानना है कि नियम स्पष्ट होने से भविष्य में भर्ती संबंधी विवाद कम होंगे.

समिति बनने के बाद ही तेज होगी प्रक्रिया

उच्च शिक्षा निदेशालय का मानना है कि एलाइड सब्जेक्ट निर्धारण के लिए समिति का गठन होने से अधियाचनों से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान निकलेगा. इससे भविष्य में भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी. राजकीय महाविद्यालयों की पूर्व भर्तियों में भी ऐसी समिति प्रभावी साबित हुई थी, इसलिए इस मॉडल को फिर अपनाने की तैयारी की जा रही है.

यह भी पढ़े: जौहर यूनिवर्सिटी पर रोक, पर छात्रों का संकट जारी


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By शशांक शेखर मिश्रा

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >