Up News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने की प्रक्रिया में हुई अत्यधिक देरी पर बेहद गंभीर टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि संविधान की गरिमा बनाए रखने के लिए अगली बार से पंचायत चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले ही अनिवार्य रूप से शुरू की जानी चाहिए. ऐसा प्रभावी कदम उठाने पर ही संविधान के अनुच्छेद 243-ई की व्यवस्था का पालन संभव होगा.
चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, रिकॉर्ड तलब
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मई में ही चुनाव प्रक्रिया शुरू की थी, फिर भी समय पर चुनाव संपन्न नहीं हो सके. पंचायतों का पांच वर्ष का संवैधानिक कार्यकाल 26 मई को ही समाप्त हो चुका है. इसलिए अदालत ने राज्य सरकार से पूरे रिकॉर्ड तलब किए हैं ताकि देरी के वास्तविक कारणों और प्रशासनिक चूक का सटीक पता लगाया जा सके.
प्रशासनिक जवाबदेही की जांच और 11 अगस्त को सुनवाई
हाईकोर्ट यह भी जांचना चाहता है कि चुनाव में हुई यह भारी देरी क्या सरकार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई या फिर यह प्रशासनिक दायित्वों की सीधी अनदेखी का परिणाम है. संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है. अदालत ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी देखे हैं और मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 11 अगस्त को तय करते हुए पुनः सारे दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है.
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