NHM Employee News: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अपनी सेवाएं दे रहे लगभग 98 हजार संविदा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कर्मचारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से न्यूनतम मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं. संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी सेवा अवधि, वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर वेतन पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बाधित की जाएगी. स्थिति को देखते हुए संगठन ने आर-पार की लड़ाई की पूरी योजना बना ली है.
नियमित और संविदा कर्मचारियों के वेतन में भारी अंतर
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के भीतर नियमित कर्मचारियों और एनएचएम कर्मियों के मानदेय में जमीन-आसमान का अंतर बना हुआ है. नियमित एएनएम और लैब सहायकों को जहां सम्मानजनक मासिक वेतन मिलता है, वहीं समान जिम्मेदारियां निभाने वाले एनएचएम कर्मियों को उसका एक-चौथाई ही दिया जा रहा है. आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मियों की हालत और भी खराब बनी हुई है. इस लगातार हो रहे आर्थिक शोषण से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते अब आंदोलन का मार्ग ही बचा है.
अन्य राज्यों की तर्ज पर पुनर्गठन की मांग
कर्मचारी संगठन ने मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के मानदेय में सुधार के लिए नीतियां लागू की जा चुकी हैं. केंद्र सरकार द्वारा मानव संसाधन बजट का आवंटन किए जाने के बावजूद उत्तर प्रदेश में इसे अब तक लागू नहीं किया गया है. वर्तमान में मौसमी बीमारियों के प्रकोप और जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल की तिथि तय नहीं की गई है, परंतु परिस्थितियां सामान्य होते ही प्रदेशव्यापी कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा.
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