UP का पहला और देश का चौथा केस, डिलीवरी के तुरंत बाद हुई महिला की ओपन हार्ट सर्जरी, मां-बच्ची दोनों सुरक्षित

UP News: लखनऊ के SGPGI में एक अभूतपूर्व चिकित्सा सफलता हासिल की गई है. 26 वर्षीय गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद ओपन हार्ट सर्जरी की गई. डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक मां और बच्ची दोनों की जान बचाई है.

UP News: लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यहां 26 वर्षीय गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद ओपन हार्ट सर्जरी की गई. 34वें सप्ताह में 2.1 किलोग्राम वजन की बच्ची के जन्म के बाद महिला के खराब हो चुके दो हार्ट वाल्व बदले गए. डॉक्टरों के अनुसार, यह उत्तर प्रदेश का पहला और देश का चौथा ऐसा मामला है, जिसमें डिलीवरी और ओपन हार्ट सर्जरी एक साथ की गई.

32वें सप्ताह में बिगड़ी महिला की हालत

बिहार के छपरा की रहने वाली 26 वर्षीय महिला पहली बार मां बनने वाली थी. गर्भावस्था के 32वें सप्ताह में अचानक उसकी सांस फूलने लगी और दिल की धड़कन तेज हो गई. परेशानी बढ़ने पर उसे SGPGI लाया गया, जहां जांच में पता चला कि उसके दिल के दो वाल्व गंभीर रूप से खराब हो चुके हैं. साथ ही उसमें पल्मोनरी हाइपरटेंशन की भी पुष्टि हुई. डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था को आगे जारी रखना या सामान्य प्रसव कराना महिला और गर्भ में पल रही बच्ची दोनों के लिए खतरनाक हो सकता था. ऐसे में SGPGI के विशेषज्ञों ने मां और बच्चे दोनों की जान बचाने के लिए एक साथ डिलीवरी और हार्ट सर्जरी करने की योजना बनाई.

पहले हुई डिलीवरी, फिर बदले गए खराब वाल्व

SGPGI की सिजेरियन सर्जरी करने वाली डॉ. नीता सिंह ने बताया कि 21 जुलाई को महिला का पहले सिजेरियन सेक्शन किया गया. इस दौरान 2.1 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ. इसके तुरंत बाद महिला की ओपन हार्ट सर्जरी शुरू की गई. करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में महिला के एओर्टिक और माइट्रल दोनों खराब वाल्व बदले गए. इस पूरी प्रक्रिया में मैटरनल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ, कार्डियोलॉजी, कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी, कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजी और नियोनेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल रहे.

मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ

सर्जरी के बाद महिला की हालत तेजी से बेहतर हुई. कुछ घंटों के अंदर ही उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया. ICU में भी उसे ब्लड प्रोडक्ट की जरूरत नहीं पड़ी और बाद में उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. वहीं नवजात बच्ची भी डॉक्टरों की निगरानी में पूरी तरह स्वस्थ है. डॉ. नीता सिंह ने बताया कि देश में अब तक इस तरह के सिर्फ तीन मामले सामने आए हैं. इनमें पांडिचेरी, एम्स दिल्ली और नाशिक में ऐसी सर्जरी की गई थी. उत्तर प्रदेश में यह पहला रिपोर्टेड केस है.

आयुष्मान योजना के तहत हुआ निशुल्क इलाज

डॉ. नीता सिंह के अनुसार, महिला का पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया गया. उन्होंने बताया कि सामान्य अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी का खर्च करीब 4 से 5 लाख रुपये तक आ सकता है, जबकि कॉरपोरेट अस्पतालों में जटिल मामलों में यह खर्च 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन ने कहा कि इतने जोखिम वाले मामले में मां और बच्चे दोनों की जान बचाना डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेषज्ञता और बेहतर समन्वय का परिणाम है. उन्होंने बताया कि SGPGI गर्भावस्था के दौरान गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है.

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By Komal Agarwal

कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

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