UP में हजारों एकड़ सरकारी जमीन का खुलेगा राज! अवैध कब्जे से फ्रीहोल्ड तक, नजूल संपत्तियों का होगा नए सिरे से सर्वे

UP Government Land: उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों को लेकर योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर कवायद शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराने का फैसला लिया गया है. इस सर्वे में अवैध कब्जे, फ्रीहोल्ड संपत्तियों और अदालतों में लंबित मामलों का पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा.

UP Government Land: उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों को लेकर योगी सरकार ने नए सिरे से कवायद शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध और उपयोग) विधेयक-2024 से जुड़ी प्रवर समिति की पहली बैठक में प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे कराने का फैसला लिया गया. सर्वे में नजूल संपत्तियों पर अवैध कब्जे, फ्रीहोल्ड संपत्तियों और अदालतों में लंबित मामलों का पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा. आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अधिकारियों को एक महीने में सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.

क्या होती है नजूल भूमि?

आजादी से पहले अंग्रेजी शासन के दौरान विद्रोह करने वाले कई लोगों को उनकी जमीन से हाथ धोना पड़ा था. अंग्रेजों ने विद्रोह करने वाले आम लोगों से लेकर राजाओं तक की जमीनों पर कब्जा किया. वहीं अंग्रेजी शासन के जुल्मों से अपना शहर या गांव छोड़कर भागने वालों को फरार घोषित कर उनकी जमीन भी अपने कब्जे में ले ली जाती थी. आजादी के बाद जिन जमीनों के मालिक या उनके वारिस अंग्रेजों द्वारा कब्जे में ली गई अपनी जमीन वापस लेने के लिए सामने नहीं आए, ऐसी जमीनें सरकार के नियंत्रण में रहीं. इन्हीं जमीनों को नजूल भूमि कहा जाता है और इन पर पूर्ण स्वामित्व सरकार का माना जाता है.

एक महीने में होगा नजूल संपत्तियों का सर्वे

बैठक में तय किया गया कि प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों यानी भूमि और भवन आदि का नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा. सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि कितनी नजूल संपत्तियां अवैध कब्जे में हैं और कितनी फ्रीहोल्ड हो चुकी हैं. इसके साथ ही नजूल संपत्तियों से जुड़े अदालतों में लंबित मामलों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सर्वे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए. प्रदेश में करीब 75 हजार एकड़ नजूल भूमि होने का अनुमान है. इसकी अनुमानित कीमत करीब दो लाख करोड़ रुपये बताई गई है. अधिकारियों को एक महीने में सर्वे रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है. रिपोर्ट आने के बाद प्रवर समिति की अगली बैठक होगी. इसके बाद विधेयक में संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी. संबंधित संशोधन प्रस्ताव को विधान परिषद के शीतकालीन सत्र में रखा जा सकता है.

विधानसभा से पास होने के बाद प्रवर समिति को भेजा गया था विधेयक

उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध और उपयोग) विधेयक-2024 विधानसभा से पारित होने के बाद विधान परिषद में पहुंचा था. बहुमत होने के बावजूद सत्ता पक्ष ने इसे विधान परिषद से पारित कराने के बजाय संशोधन के लिए प्रवर समिति को भेजने का निर्णय लिया था. इसके लिए आवास मंत्री का दायित्व भी संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में विधान परिषद की नौ सदस्यीय प्रवर समिति का गठन किया गया था. समिति में डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, लालजी प्रसाद निर्मल, डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, डॉ. पीके श्रीवास्तव, आशुतोष सिन्हा, विच्छे लाल राम, योगेश चौधरी, ध्रुव कुमार त्रिपाठी और राजबहादुर सिंह चंदेल शामिल हैं. बुधवार को विधानभवन के कक्ष संख्या-77 में समिति की पहली बैठक हुई. इस दौरान आवास विभाग की ओर से नजूल संपत्तियों से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया गया.

सदस्यों ने रखे सुझाव, योगी ने दिए सर्वे के निर्देश

बैठक में सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें वर्षों से वैध रूप से रह रहे नागरिकों, पट्टेदारों, गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हितों की रक्षा हो. इसके साथ ही सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए. राज बहादुर चंदेल ने नजूल जमीनों के बेहतर उपयोग की बात रखी. वहीं विधान परिषद में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विधेयक को जन उपयोगी बताया. सदस्यों के सुझावों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर की नजूल संपत्तियों का नए सिरे से एक महीने में सर्वे कराने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से नजूल संपत्तियों पर अवैध कब्जे और अदालतों में लंबित मामलों का पूरा ब्योरा जुटाने को कहा. साथ ही सभी संशोधन प्रस्तावों का विधिक आधार पर परीक्षण कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.

नजूल जमीन को लेकर सरकार का क्या है रुख?

सरकार का मानना है कि पूर्व की सरकारों के दौरान अरबों रुपये की नजूल संपत्तियों को कौड़ियों के भाव फ्रीहोल्ड किया गया. नजूल भूमि पर कब्जे और उसे फ्रीहोल्ड कराने के मामलों को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है. प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद नजूल भूमि का इस्तेमाल विकास और सार्वजनिक कार्यों में ही किए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है. प्रस्ताव के मुताबिक नजूल भूमि का पूर्ण स्वामित्व किसी निजी व्यक्ति या संस्था को नहीं दिया जाएगा. कोर्ट या प्राधिकारी के समक्ष लंबित आवेदन अस्वीकृत समझे जाएंगे. जिस नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कराने के लिए रकम जमा की गई है, उसे वापस किए जाने का प्रावधान भी प्रस्तावित है. वहीं लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी जितने दिन पट्टाधारी जमीन पर काबिज रहेगा, उस अवधि का किराया वसूलने का अधिकार जिलाधिकारी को होगा.

अखिलेश यादव ने विधेयक को लेकर क्या कहा?

नजूल भूमि विधेयक को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि नजूल जमीन विधेयक भाजपा के कुछ लोगों के व्यक्तिगत फायदे के लिए लाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने आसपास की जमीन को हड़पना चाहते हैं. अखिलेश यादव ने गोरखपुर में ऐसी कई जमीनों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने के लिए इन जमीनों को हथियाना चाहते हैं.

करोड़ों का बताया जाता है नजूल जमीन का अवैध कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार फर्जी दस्तावेजों और रसूख के बल पर नजूल भूमि पर कब्जा करने और उसे फ्रीहोल्ड कराने का खेल पुराना है. वर्ष 1993 में केंद्र सरकार ने पूर्व गृह सचिव एनएन वोहरा की अगुवाई में एक समिति गठित की थी. उसकी रिपोर्ट में राजनेताओं, अपराधियों, भूमाफिया, नौकरशाहों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के संगठित गिरोह को लेकर चिंता जताई गई थी. भूमि और भवनों पर जबरन कब्जा करना, मौजूदा निवासियों या किराएदारों को बाहर निकालना और ऐसी संपत्तियों को सस्ते दामों पर खरीदना इस पूरे खेल का हिस्सा रहा है. सरकारी जमीनों को सर्किल रेट के केवल 10 प्रतिशत भुगतान पर फ्रीहोल्ड कराने का खेल चलने का भी उल्लेख किया गया है. प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, वाराणसी, सुलतानपुर, गोंडा और बाराबंकी जैसे शहरों में नजूल भूमि अधिक होने का अनुमान है. प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र की अधिकतर जमीन नजूल की बताई जाती है.

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By खुशबू कुमारी

खुशबू कुमारी पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज, से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया है तथा वर्तमान में इग्नू से मास्टर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन एंड डिजिटल मीडिया) की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें जनहित से जुड़ी खबरों, डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइन में विशेष रुचि है. वे राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर शोधपरक, तथ्यपरक और पाठकों के लिए उपयोगी डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं. उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है, ताकि समाचार केवल सूचना का माध्यम न होकर समाज के लिए उपयोगी साबित हों.

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