RBI पहुंची 111 करोड़ की खेप, जाली नोटों के पीछे कौन? जानिए हाउसकीपर को क्यों दिया गया करेंसी पैकिंग का काम

UP Fake Currency: सहारनपुर की PNB करेंसी चेस्ट से भेजी गई 111 करोड़ की खेप RBI जयपुर में जाली पाई गई है. इस मामले में बैंक की पूरी कैश प्रबंधन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. जांच एजेंसियां गहन पड़ताल में जुटी हैं.

UP Fake Currency: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करेंसी चेस्ट के जरिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जयपुर भेजी गई 111 करोड़ रुपये की करेंसी अब जांच के केंद्र में है. छह जुलाई 2026 को भेजी गई इस खेप के RBI जयपुर पहुंचने के बाद करेंसी के जाली मिलने के मामले ने बैंक की करेंसी चेस्ट में नकदी की गिनती, बंडल तैयार करने, पैकिंग, सीलिंग और डिस्पैच की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन कर्मचारी शामिल था और किस स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई.

छह जुलाई को भेजी गई थी 111 करोड़ की करेंसी

PNB के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे की शिकायत में 111 करोड़ रुपये की करेंसी भेजे जाने का उल्लेख है. FIR में भी इसी रकम को दर्ज किया गया है. दी गई जानकारी के अनुसार, खेप में 500 रुपये के 1900 बंडल और 200 रुपये के 800 बंडल शामिल थे. जांच एजेंसियां अब छह जुलाई को करेंसी की गिनती से लेकर बंडल बनाने, पैकिंग, सीलिंग और डिस्पैच तक की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं.

हाउसकीपर को क्यों दिया गया करेंसी पैकिंग का काम?

मामले की जांच में एक अहम बिंदु यह सामने आया है कि करेंसी की पैकिंग और भेजने की प्रक्रिया के लिए एक पार्ट टाइम हाउसकीपर को लगाया गया था. अब जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि उसे करेंसी से जुड़ा संवेदनशील काम किस अधिकारी के आदेश पर सौंपा गया था और उसकी जिम्मेदारी वास्तव में क्या थी. इसके साथ ही छह जुलाई के कैश रिकॉर्ड, बंडल संख्या, पैकिंग और सीलिंग का विवरण, डिस्पैच रजिस्टर और उस दिन ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है.

रिकॉर्ड में अंतर मिला तो बढ़ सकती है मुश्किल

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू सहारनपुर से भेजी गई करेंसी और RBI जयपुर में प्राप्त हुई करेंसी के रिकॉर्ड का मिलान है. अगर दोनों रिकॉर्ड में कोई अंतर सामने आता है तो जांच की दिशा और गंभीर हो सकती है. वहीं रिकॉर्ड सही पाए जाने पर भी करेंसी चेस्ट जैसी संवेदनशील जगह पर पार्ट टाइम हाउसकीपर को करेंसी से जुड़ा काम सौंपने की प्रक्रिया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में रहेगी.

तीन बैंक अधिकारियों पर नजर, लुकआउट नोटिस जारी

मामले में नामजद PNB के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक रवि कुमार कांसे, सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार और जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार की तलाश तेज कर दी गई है. तीनों के नेपाल भागने की आशंका के चलते पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए हैं. पुलिस और जांच एजेंसियां उनकी तलाश के साथ उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और पिछले कई महीनों की गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं.

SIT और क्राइम ब्रांच कर रही जांच

घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट की PNB करेंसी चेस्ट में SIT की जांच जारी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP अभिनंदन ने क्राइम ब्रांच को भी जांच में लगाया है. SIT और क्राइम ब्रांच ने तीनों आरोपितों के घरों की तलाशी लेकर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए हैं. इनके फॉरेंसिक परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जाली करेंसी के मामले में तीनों की भूमिका किस स्तर तक थी और उनके संपर्क किन लोगों से थे.

आदेश नाम का निजी व्यक्ति भी जांच के दायरे में

पुलिस के अनुसार, अमित कुमार जब सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट के प्रबंधक थे, तब उन्होंने आदेश नाम के एक निजी व्यक्ति को अपने कामों के लिए रखा हुआ था. अब आदेश भी लापता बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आदेश को किस तरह के काम सौंपे गए थे और करेंसी चेस्ट से जुड़े लोगों के साथ उसका किस तरह का संपर्क था.

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By खुशबू कुमारी

खुशबू कुमारी पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज, से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया है तथा वर्तमान में इग्नू से मास्टर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन एंड डिजिटल मीडिया) की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें जनहित से जुड़ी खबरों, डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइन में विशेष रुचि है. वे राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर शोधपरक, तथ्यपरक और पाठकों के लिए उपयोगी डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं. उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है, ताकि समाचार केवल सूचना का माध्यम न होकर समाज के लिए उपयोगी साबित हों.

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