शाहजहांपुर में जाम बना मुसीबत, आधे घंटे फंसी एंबुलेंस, प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला ने गाड़ी में ही दिया बेटी को जन्म

शाहजहांपुर में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को अस्पताल ले जाने के लिए जब 108 एंबुलेंस जाम में फंसी, तो एंबुलेंस ही उसका प्रसव कक्ष बन गई. आशा कार्यकर्ता और ईएमटी की सूझबूझ से जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहे.

UP News: जिस एंबुलेंस में प्रसूता को सुरक्षित अस्पताल पहुंचना था, वही जाम के बीच महिला का प्रसव कक्ष बन गई. शाहजहांपुर में कलान ब्लॉक के हेतमपुर आर्यनगर की मोनी को सोमवार की देर शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजन उसे 108 एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर जा रहे थे, लेकिन ब्लॉक मार्ग पर बेतरतीब खड़े वाहनों और बजरी उतार रही ट्रॉली ने रास्ता रोक दिया. करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस जाम में फंसी रही. चालक हूटर बजाता रहा और परिजन रास्ता देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन मदद नहीं मिली. आखिरकार प्रसव पीड़ा बढ़ने पर आशा कार्यकर्ता और ईएमटी ने एंबुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया. मोनी ने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया.

अस्पताल पहुंचने से पहले ही बढ़ गई प्रसव पीड़ा

यह मामला कलान ब्लॉक का है. हेतमपुर आर्यनगर निवासी मोनी को सोमवार शाम अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजन उसे 108 एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए निकले. परिवार को उम्मीद थी कि कुछ ही देर में अस्पताल पहुंचकर महिला को उपचार मिल जाएगा, लेकिन रास्ते में लगा जाम उनकी परेशानी का सबब बन गया.

बेतरतीब पार्किंग और ट्रॉली ने रोक दिया रास्ता

ब्लॉक मार्ग पर दोनों तरफ वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े थे. इसी बीच एक निर्माणाधीन मकान के सामने बजरी उतार रही ट्रॉली ने रास्ते को और संकरा कर दिया. देखते ही देखते एंबुलेंस आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं रही. चालक हरकिशन लगातार हूटर बजाता रहा, लेकिन जाम में फंसे लोगों ने एंबुलेंस को साइड नहीं दी.

परिवार ने हाथ जोड़कर मांगा रास्ता, लेकिन नहीं पसीजा जाम

एंबुलेंस के भीतर मोनी की प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ रही थी. बाहर परिवार के लोग लोगों से हाथ जोड़कर रास्ता देने की गुहार लगाते रहे. इस बीच पीछे से वाहनों की कतार बढ़ती गई और एंबुलेंस जाम के बीच पूरी तरह फंस गई. अस्पताल की दूरी कम थी, लेकिन जाम ने उस दूरी को बेहद मुश्किल बना दिया था.

एंबुलेंस बनी प्रसव कक्ष, आशा और ईएमटी ने संभाला मोर्चा

महिला की हालत बिगड़ती देख एंबुलेंस में मौजूद आशा कार्यकर्ता सरोजनी और ईएमटी धीरू राठौर ने स्थिति को संभाला. अस्पताल तक पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने एंबुलेंस के भीतर ही प्रसव कराने का फैसला किया. सीमित संसाधनों के बीच दोनों ने सुरक्षित प्रसव कराया. कुछ देर बाद एंबुलेंस के भीतर नवजात बच्ची के जन्म की किलकारी गूंजी. मोनी ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया.

आधे घंटे बाद पुलिस ने खुलवाया रास्ता

करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस जाम में फंसी रही. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सड़क पर बेतरतीब खड़े वाहनों को हटवाया. इसके बाद रास्ता खुल सका और एंबुलेंस को आगे जाने का रास्ता मिला.

जच्चा-बच्चा दोनों की हालत ठीक

जाम खुलने के बाद मोनी और नवजात बच्ची को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर भर्ती कराया गया. अस्पताल में दोनों की हालत ठीक बताई जा रही है. हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर बेतरतीब पार्किंग और अतिक्रमण की वजह से पैदा होने वाली मुश्किलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस एंबुलेंस का काम मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना था, वही जाम के बीच प्रसव कराने को मजबूर हो गई.

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लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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