UP News: लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को भीषण आग में 15 लोगों की जान जाने वाली इमारत पर आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. शनिवार सुबह लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भारी पुलिस बल और मशीनों की मौजूदगी में अवैध घोषित भवन को ध्वस्त करना शुरू किया. वहीं, भवन मालिक की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अदालत का रुख करने की बात कही गई है.
भारी सुरक्षा के बीच शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
शनिवार सुबह एलडीए की टीम तीन बुलडोजर, एक हाइड्रोलिक मशीन और अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची. कार्रवाई के दौरान आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी गई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई. प्रशासन का अनुमान है कि पूरे भवन को गिराने में पूरा दिन लग सकता है.
एलडीए ने अवैध निर्माण बताकर लिया फैसला
अग्निकांड के बाद हुई जांच में सामने आया कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसका उपयोग स्वीकृत मानकों के विपरीत किया जा रहा था. रिहायशी भवन को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया था. जांच के बाद एलडीए ने भवन स्वामी को नोटिस जारी किया और निर्धारित समय के भीतर स्वयं भवन हटाने का निर्देश दिया था. तय समय सीमा पूरी होने के बाद प्राधिकरण ने खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी.
भवन मालिक ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
ध्वस्तीकरण के दौरान भवन मालिक की ओर से पहुंचे अधिवक्ता ने दावा किया कि 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन उसी दिन कार्रवाई शुरू कर दी गई. उनका कहना है कि अलग से ध्वस्तीकरण आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल नोटिस के आधार पर कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है और प्रशासन की कार्रवाई को कानूनी चुनौती दी जाएगी.
22 जून को आग में गई थीं 15 लोगों की जान
22 जून को अलीगंज स्थित इस चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली थी. हादसे के दौरान कई लोग जान बचाने के लिए इमारत से कूदे, जबकि कुछ ने पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरकर खुद को बचाया. घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था, जबकि चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
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