UP News: अलीगढ़ में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं के शैक्षिक और अन्य दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाने वाले साइबर ठग गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. बन्नादेवी पुलिस, क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने 97 फर्जी बैंक खातों के जरिए करीब 15 करोड़ रुपये की संदिग्ध और अवैध रकम का लेन-देन किया है.
नौकरी का झांसा देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस के अनुसार, आरोपी बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का लालच देकर उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल करते थे. इन्हीं दस्तावेजों की मदद से उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते थे. इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था. पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कूटरचित दस्तावेज, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य सामान बरामद किया है.
दुबई में रहकर गिरोह चला रहा था मास्टरमाइंड
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की रामप्रस्था कॉलोनी ग्रीन वैली निवासी दिव्यांश कुमार है. वह करीब सात साल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में रह चुका है. आरोप है कि वहां उसने अपने संपर्कों के जरिए साइबर ठगी कराई और रकम इन बैंक खातों में मंगवाता था. उसका सहयोगी अलीगढ़ के ज्वालापुरी निवासी मनोज कुमार अकाउंटेंट का काम संभालता था और अलीगढ़ में गिरोह की गतिविधियां देखता था. गिरोह में फर्रुखाबाद के कायमगंज निवासी रितिक अनुराग और सुंदरम तथा गुजरात के भुज निवासी नीरज भी शामिल हैं.
फर्जी दस्तावेज और दो लग्जरी कारें बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 फर्जी आधार कार्ड, छह पैन कार्ड, 15 एटीएम कार्ड, सात चेकबुक, 14 मोबाइल फोन समेत लैपटॉप, सीपीयू, सिम कार्ड, बैंक पासबुक, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, स्टांप रेंट एग्रीमेंट, ड्राइविंग लाइसेंस और डायरी बरामद की है. इसके अलावा अलीगढ़ नंबर की वैगन आर और गुरुग्राम नंबर की फोर्ड एंडेवर कार भी बरामद हुई है. एसपी सिटी आदित्य बंसल ने बताया कि जांच में 97 फर्जी बैंक खातों का पता चला है, जिनसे करीब 15 करोड़ रुपये का संदिग्ध और अवैध लेन-देन हुआ. मामले में बन्नादेवी थाने में केस दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
