UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अगस्त को अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में इतिहास को केवल पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि उससे सीख और प्रेरणा लेने का माध्यम बताया. उन्होंने कहा कि 500 साल पहले संभल में हरिहर मंदिर को तोड़कर गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया और इसके दो साल बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भी ऐसी ही घटना दोहराई गई.
इतिहास सिर्फ पढ़ने का विषय नहीं
उन्होंने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रेरणा और सबक भी देता है. अतीत के गौरवशाली क्षणों से हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, वहीं अतीत की गलतियां भविष्य में उन्हें दोहराने से बचने का अवसर देती हैं. उन्होंने कहा कि इतिहास की अनदेखी का अर्थ अतीत की गलतियों को दोहराने का प्रयास करना है.
संभल और अयोध्या का किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1526 में, आज से करीब 500 वर्ष पहले, संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर वहां गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया था. उन्होंने कहा कि अगर 1526 में ही इसका एकजुट होकर प्रतिकार हुआ होता तो संभव है कि 1528 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर ऐसी घटना दोहराने का दुस्साहस कोई नहीं करता. उन्होंने कहा कि दो साल बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को क्षतिग्रस्त कर सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित किया गया.
एकता की कमी को बताया बड़ी वजह
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी से पहले भारत के पास बल, बुद्धि और वैभव की कोई कमी नहीं थी. कमी थी तो एकता की और एक दिशा में, एक स्वर में साथ चलने की. उन्होंने कहा, “हम बंटे थे और इसीलिए तो कटे थे.” सीएम योगी ने इतिहास से सीख लेते हुए एकजुटता को जरूरी बताया.
विभाजन की पीड़ा का भी किया उल्लेख
14 अगस्त 1947 का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आजादी से ठीक एक दिन पहले केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटे थे, बल्कि भारत भी बंटा था. उन्होंने कहा कि सदियों से एक इकाई के रूप में रहा भारत विभाजन की त्रासदी से गुजरा. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इतिहास के इन प्रसंगों को वर्तमान पीढ़ी के लिए सबक बताते हुए अतीत से सीख लेने पर जोर दिया.
राम जन्मभूमि आंदोलन और परमहंस रामचंद्र दास को किया याद
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामानुजाचार्य की 23वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज के जीवन का एकमात्र ध्येय श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण था. राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही और उनका पूरा जीवन इस आंदोलन के लिए समर्पित रहा. सीएम ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के राम भक्तों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
