UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महिला अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि गर्भावस्था सरकारी नौकरी पाने में बाधा नहीं बन सकती और इसी आधार पर वन रक्षक भर्ती की अभ्यर्थी कोमल जायसवाल की दोबारा पीईटी कराने का आदेश यूपीएसएसएससी को दिया है.
कोर्ट ने आयोग का फैसला किया निरस्त
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने कोमल जायसवाल की विशेष अपील स्वीकार करते हुए आयोग के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें उनकी पीईटी स्थगित करने की मांग खारिज कर दी गई थी. अदालत ने कहा कि यदि नियमों में परीक्षा स्थगित करने पर स्पष्ट रोक नहीं है, तो आयोग को ऐसे मामलों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.
गर्भावस्था के कारण नहीं दे सकीं थीं पीईटी
कोमल जायसवाल ने वर्ष 2023 की वन रक्षक एवं वन्यजीव रक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी. हालांकि, शारीरिक दक्षता परीक्षा के समय वह नौ माह की गर्भवती थीं. उन्होंने आयोग से बाद में पीईटी कराने का अनुरोध किया था, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया गया. इसके बाद उनकी याचिका एकल पीठ ने भी खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उन्होंने विशेष अपील दाखिल की.
चार सप्ताह में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि विवाह और मातृत्व किसी महिला की नियुक्ति में बाधा नहीं बन सकते. अदालत ने यह भी माना कि लिखित परीक्षा और पीईटी के बीच दो वर्ष से अधिक का अंतर रहा, ऐसे में इस दौरान विवाह और गर्भधारण स्वाभाविक है. कोर्ट ने आयोग को चार सप्ताह के भीतर कोमल जायसवाल की दोबारा पीईटी कराने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा कि यदि वह पीईटी, मेडिकल परीक्षण और मेरिट में सफल होती हैं, तो उन्हें उसी तिथि से नियुक्ति का लाभ दिया जाए, जिस दिन उनसे कम मेरिट वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति मिली थी. इसके अलावा, ओबीसी महिला वर्ग का एक पद अगली सुनवाई तक रिक्त रखने का भी आदेश दिया गया है.
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