जिंदा था 7 साल का बेटा, पिता के मरने के बाद मां ने बनवा दिया डेथ सर्टिफिकेट, जानिए क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के महोबा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक माँ पर अपने 7 वर्षीय जीवित बेटे का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप है. इसका उद्देश्य बेटे के नाम दर्ज संपत्ति को अपने नाम कराना था.

UP News : उत्तर प्रदेश के महोबा में संपत्ति विवाद से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि एक महिला ने अपने ही सात वर्षीय जीवित बेटे का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया. इसके बाद इसी प्रमाण पत्र के आधार पर बेटे के नाम दर्ज जमीन की वरासत अपने नाम कराने की कोशिश की गयी. मामले की जानकारी बच्चे के दादा को हुई तो उन्होंने एसडीएम से शिकायत कर दी. इसके बाद तहसील से लेकर नगर पालिका तक हड़कंप मच गया. एसडीएम ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं.

पति ने मौत से पहले बेटे के नाम कर दी थी जमीन

मामला महोबा के महतवाना मोहल्ले का बताया जा रहा है. यहां रहने वाले हरीश चौरसिया की वर्ष 2020 में लंबी बीमारी के बाद मौत हो गयी थी. बताया जा रहा है कि मौत से पहले हरीश ने अपनी जमीन की वसीयत अपने नाबालिग बेटे पुष्पराज के नाम कर दी थी. उन्होंने पत्नी रजनी को बेटे का संरक्षक बनाया था. परिवार के मुताबिक, पति की मौत के बाद जमीन पर बेटे का अधिकार हो गया. आरोप है कि इसी संपत्ति को अपने नाम कराने के लिए रजनी ने कथित तौर पर फर्जीवाड़े का सहारा लिया.

सात साल के जिंदा बच्चे को कागजों में मृत दिखाया

आरोप है कि रजनी ने अपने सात वर्षीय बेटे पुष्पराज को कागजों में मृत दिखाकर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया. प्रमाण पत्र में बच्चे की मौत 3 मार्च 2019 को दर्शायी गयी है, जबकि यह प्रमाण पत्र 7 जनवरी 2026 को जारी किया गया. इसके बाद इसी मृत्यु प्रमाण पत्र को तहसील में प्रस्तुत कर बेटे के नाम दर्ज जमीन की वरासत अपने नाम कराने की कोशिश की गयी. मामला आगे बढ़ता, उससे पहले ही बच्चे के दादा को इसकी जानकारी मिल गयी.

दादा ने कहा- मेरा पोता जिंदा है और स्कूल जाता है

मामले की जानकारी मिलते ही बच्चे के दादा कुंवर बहादुर एसडीएम के पास पहुंचे और लिखित शिकायत दी. उन्होंने बताया कि उनका पोता पुष्पराज पूरी तरह स्वस्थ और जिंदा है. वह एक निजी स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ रहा है. दादा ने आरोप लगाया कि बच्चे को कागजों में मृत दिखाकर उसकी बेशकीमती जमीन हड़पने की कोशिश की गयी है. शिकायत के बाद एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिये.

मां ने ससुराल वालों पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

वहीं, पुष्पराज की मां रजनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों के बीच ससुराल पक्ष पर ही प्रताड़ना का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि उसने अपने बेटे का नाम युवांश रखा था, लेकिन ससुराल वालों ने उसका नाम बदलकर आधार कार्ड में पुष्पराज करा दिया. रजनी के मुताबिक, पति की मौत के बाद से उसे ससुराल में परेशान किया जाता रहा है. उसने बताया कि उसके दो बेटियां और एक बेटा है और बच्चों के खर्च की जिम्मेदारी भी उसी पर है. उसका आरोप है कि ससुराल वाले उसे पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं देते हैं.

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल एसडीएम के आदेश के बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गयी है. मृत्यु प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुआ, उसमें दर्ज जानकारी सही थी या नहीं और जमीन की वरासत में किस स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही मामले में फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर साफ होगी.

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By रवि रंजन कुमार

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