छोटी-छोटी बातें भूलना कहीं बीमारी का संकेत तो नहीं? ये आदतें आज ही छोड़ दें, जानें कैसे रखें दिमाग को स्वस्थ

छोटी-छोटी बातें भूलना, जैसे चाबी या फोन, अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक पर बढ़ती निर्भरता दिमाग की कसरत कम कर रही है, जिससे याददाश्त कमजोर हो रही है. इस समस्या से बचने और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाएं.

UP News : क्या आपको भी फोन नंबर, चाबी, चश्मा या हाल में हुई कोई बात याद रखने में परेशानी होती है? अगर ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे सिर्फ काम का दबाव या सामान्य भूलने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक याददाश्त में लगातार गिरावट अल्जाइमर जैसी बीमारी का संकेत हो सकती है. तकनीक पर बढ़ती निर्भरता से दिमागी कसरत कम होने की बात भी विशेषज्ञों ने कही है.

कम हो रही दिमागी कसरत

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर के मुताबिक पहले पढ़ाई, प्रोजेक्ट या किसी समस्या को हल करने के लिए लोग काफी समय तक दिमाग लगाते थे. समाधान नहीं मिलने पर शिक्षक या किसी जानकार की मदद लेते थे. अब छोटी-सी उलझन का हल भी तकनीक के जरिए तुरंत खोज लिया जाता है. गुणा-भाग से लेकर पढ़ाई-लिखाई और दूसरे बौद्धिक कामों में मोबाइल, कंप्यूटर और एआई पर निर्भरता बढ़ी है. इससे दिमाग को नियमित रूप से सोचने और याद रखने की कसरत कम मिल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर याददाश्त और बौद्धिक क्षमता पर पड़ सकता है.

हर सप्ताह 25-30 मरीजों में मिल रही भूलने की समस्या

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की जेरियाट्रिक ओपीडी में हर सप्ताह करीब 25 से 30 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें भूलने की समस्या पायी जा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कोई बुजुर्ग हाल की घटनाएं भूलने लगे, जबकि पुरानी बातें याद रहें या भोजन और दवा लेने के बाद दोबारा वही चीज मांगने लगे, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टेलीमानस नंबर 14416 पर 24 घंटे फोन कर काउंसिलिंग की सुविधा भी ली जा सकती है.

40-50 की उम्र में भी पहुंच रहे मरीज

एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि लोग मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का औसतन चार से पांच घंटे इस्तेमाल कर रहे हैं. ओटीटी और शॉर्ट फिल्म के बढ़ते चलन के कारण स्क्रीन टाइम और बढ़ रहा है. ओपीडी में 40 से 50 वर्ष की उम्र के ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिन्हें फोन नंबर, चाबी और चश्मा जैसी चीजें भूलने की शिकायत है. कुछ मरीजों को हाल की घटनाएं याद रखने में भी परेशानी हो रही है. कई लोग शुरुआत में इसे काम के दबाव या व्यस्तता से जोड़कर देखते हैं, लेकिन लगातार समस्या होने पर जांच जरूरी है.

केस-1: पहले पर्स और चाबी भूलते थे, फिर जरूरी काम भूलने लगे

दयालबाग निवासी 42 वर्षीय एक व्यक्ति निजी कंपनी में काम करते हैं और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करते हैं. शुरुआत में उन्हें पर्स और कार की चाबी भूलने की समस्या हुई. धीरे-धीरे वह घर के जरूरी काम भी भूलने लगे. उन्होंने शुरुआत में इसे काम के अधिक दबाव का नतीजा माना. समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से जांच करायी तो बीमारी का पता चला और उनका इलाज शुरू किया गया.

केस-2: खाना और दवा लेने के बाद भी दोबारा मांगने लगे

सदर निवासी 66 वर्षीय बुजुर्ग भोजन और दवा लेने के बाद उसे भूल जाते थे. कुछ समय बाद वह दोबारा खाना मांगते थे. परिजन बताते कि वह खाना खा चुके हैं, लेकिन वह इसे मानने को तैयार नहीं होते थे. इस समस्या को लेकर उन्होंने बेटे से शिकायत भी की. परिवार में इसे लेकर विवाद होने लगा. परेशानी बढ़ने पर बेटे ने उन्हें डॉक्टर को दिखाया, जिसके बाद बीमारी का पता चला और अब उनका इलाज चल रहा है.

दिमाग को सक्रिय रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों ने दिमाग को सक्रिय रखने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ आदतों को शामिल करने की सलाह दी है.

  • शतरंज, लूडो, सांप-सीढ़ी और कैरम जैसे खेल खेलें.
  • तनाव से बचने की कोशिश करें.
  • रोजाना करीब एक घंटे किताब, अखबार या मैगजीन पढ़ें.
  • मोबाइल, एआई और दूसरे तकनीकी संसाधनों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता कम करें.
  • रोजाना पैदल चलें और नियमित व्यायाम करें.
  • पर्याप्त नींद लें.
  • भोजन में मोटा अनाज, फल, ड्राईफ्रूट्स, दाल और हरी सब्जियां शामिल करें.
  • नियमित योग और ध्यान करें.

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लेखक के बारे में

By रवि रंजन कुमार

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