UP Accident: सावन में भगवान शिव की भक्ति में कांवड़ लेकर निकले श्रद्धालुओं के लिए उत्तर प्रदेश की सड़कें कई जगह जानलेवा साबित हुई हैं. यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों में हुए सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं में कई कांवड़ियों की जान जा चुकी है. हाल के दिनों में प्रयागराज, गाजियाबाद और शाहजहांपुर में हुए हादसों ने एक बार फिर कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
प्रयागराज में बाइक हादसे में तीन कांवड़ियों की मौत
प्रयागराज में संगम से गंगाजल लेकर वाराणसी जा रहे तीन कांवड़ियों की सड़क हादसे में मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार बाइक और ऑटो के बीच टक्कर हुई थी. हादसा इतना भीषण था कि तीनों की जान चली गई. यह घटना कांवड़ यात्रा के अंतिम दौर में सामने आई.
गाजियाबाद में खड़े ट्रक से टकराई बाइक, दो की मौत
गाजियाबाद में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी दर्दनाक हादसा हुआ. हरिद्वार से लौट रहे चार दोस्तों की बाइक खड़े दूध के ट्रक से टकरा गई. हादसे में दो कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए. घटना 20 अगस्त की बताई गई है.
शाहजहांपुर में ट्रक ने ट्रैक्टर-ट्रॉली में मारी टक्कर
शाहजहांपुर में शुक्रवार तड़के तेज रफ्तार ट्रक ने कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी. हादसे में करीब 15 कांवड़िए घायल हुए. गंभीर रूप से घायल दो कांवड़ियों ने बरेली ले जाते समय दम तोड़ दिया. पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है.
गोरखपुर में हाईटेंशन तार बना काल
गोरखपुर में भी कांवड़ यात्रा के दौरान हादसा हुआ. ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लगा डीजे 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया. करंट की चपेट में आने से 24 वर्षीय कांवड़िए करन चौहान की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक झुलस गया. घटना ने ऊंचे डीजे और बिजली लाइनों के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
मेरठ में भी सड़क हादसों ने बढ़ाई चिंता
कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ के दिल्ली-रुड़की हाईवे पर भी अलग-अलग हादसे सामने आए. रिपोर्ट के मुताबिक 24 घंटे के भीतर हुए हादसों में तीन कांवड़ियों की मौत और 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी. तेज रफ्तार वाहनों और कांवड़ मार्ग पर यातायात प्रबंधन को लेकर इन घटनाओं ने चिंता बढ़ाई.
सुरक्षा इंतजामों के बावजूद हादसे चुनौती
कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन, मेडिकल कैंप और यातायात व्यवस्था के इंतजाम किए थे. सरकार और पुलिस की ओर से दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष जोर दिया गया था. इसके बावजूद अलग-अलग मार्गों पर हादसे सामने आए हैं. इन घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा, भारी वाहनों की आवाजाही, डीजे की ऊंचाई और हाईटेंशन लाइनों से दूरी जैसे मुद्दे सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं. हालांकि पूरे प्रदेश में अब तक हुई मौतों का कोई एक आधिकारिक समेकित आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं दिखता. इसलिए अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों के आंकड़ों को जोड़कर कोई अंतिम संख्या बताना फिलहाल सावधानी के बिना सही नहीं होगा. कांवड़ यात्रा का मुख्य चरण पूरा होने के बाद भी प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि लौट रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए. खासकर हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों की रफ्तार, रात के समय यात्रा और कांवड़ियों के जत्थों की सुरक्षा पर निगरानी जरूरी है.
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