UP News: उत्तर प्रदेश के वन विभाग ने राज्य के पुराने और गायब हो रहे पेड़-पौधों को बचाने की नई तैयारी की है. इस योजना के तहत सरकारी नर्सरियों में उन पौधों को उगाया जाएगा, जो अब बहुत कम दिखाई देते हैं. विभाग का मुख्य ध्यान कैथा, खिरनी, बड़हल, पलाश और बहेड़ा जैसी पुरानी प्रजातियों पर है. ये सभी पेड़ हमारे इलाके की हवा, मिट्टी और पारंपरिक इस्तेमाल के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं. इन्हें सही समय पर बचाना बेहद आवश्यक है.
हर जिले में पौधे उगाने और उन्हें सहेजने की व्यवस्था
इस काम को ठीक से करने के लिए हर जिले का अलग-अलग लक्ष्य तय किया जाएगा. स्थानीय मौसम के हिसाब से बीजों को जमा करके नर्सरी में नए पौधे तैयार होंगे. सभी नर्सरियों में 'भूली-बिसरी प्रजातियां' नाम का एक अलग कोना बनेगा. यहाँ ये दुर्लभ पौधे उगाए जाएंगे और आने वाले लोगों को इनके बारे में आसान भाषा में जानकारी दी जाएगी. बाद में इन तैयार पौधों को जंगलों और खाली जमीनों में लगाकर उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा.
वैज्ञानिकों की मदद से सही तरीके से होगा पौधरोपण
पौधों को सही तरीके से उगाने के लिए लखनऊ के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) के वैज्ञानिकों की सलाह ली जाएगी. विशेषज्ञ बताएंगे कि बीज कैसे इकट्ठा करें और पौधों की देखभाल कैसे करें. कतर्नियाघाट की टिकली और चित्रकूट के रूडी पेड़ जैसी खास जगहों की प्रजातियों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा. इससे राज्य का पर्यावरण बेहतर होगा और पुराने पेड़ों की धरोहर बची रहेगी. इस कदम से आने वाली पीढ़ियों को भी इन पौधों का लाभ आसानी से मिल सकेगा.
जनता की भागीदारी से अभियान को बनाया जाएगा सफल
वन विभाग इस पूरे अभियान में स्थानीय लोगों और बच्चों को भी जोड़ने की योजना बना रहा है. गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को इन पारंपरिक पेड़ों के लाभ बताए जाएंगे. स्कूलों और पंचायतों के माध्यम से पौधरोपण का कार्य किया जाएगा, ताकि लोग इन पौधों की देखरेख अपनी जिम्मेदारी समझकर करें. इस तरह जनभागीदारी से न केवल गायब होते पेड़ बचेंगे, बल्कि राज्य में हरियाली का दायरा भी तेज़ी से बढ़ेगा और प्रकृति का संतुलन पूरी तरह से बना रहेगा.
