UP FLOOD: चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी का प्रचंड रूप कुछ धीमा अवश्य पड़ा है, किंतु बाढ़ की भीषण विभीषिका अभी समाप्त नहीं हुई. शनिवार को नदी का जल स्तर 135.200 मीटर के अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया था. रविवार प्रात:काल भी यह डेंजर मार्क 126.500 मीटर से लगभग 1.20 मीटर ऊपर बहती पाई गई. जलस्तर कम होने के साथ रामघाट के आसपास जनजीवन सामान्य करने के प्रयास प्रारंभ हो चुके हैं, फिर भी तबाही के निशान स्पष्ट दिख रहे हैं.
पुनर्वास तथा मूलभूत सुविधाओं का संकट
बाढ़ प्रभावित बस्तियों में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप होने के कारण पेयजल का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है. रिहाइशी मकानों एवं व्यापारिक दुकानों में जल तथा कीचड़ घुसने से अमूल्य घरेलू सामग्री नष्ट हो गई. अपना निवास स्थान छोड़कर सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुँचे नागरिकों के समक्ष भोजन, स्वच्छ जल एवं अस्थाई आवास की विकट समस्या खड़ी है. प्रशासनिक अमले के लिए पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुँचाना इस समय सबसे प्राथमिक आवश्यकता बन चुका है.
क्षतिग्रस्त मार्ग एवं टूटा यातायात संपर्क
बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव से सड़कों तथा पुलों का परिवहन तंत्र बुरी तरह चरमरा गया है. यद्यपि झांसी-मीरजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया है, किंतु चित्रकूट-सतना एवं मानिकपुर-सतना मार्ग कटाव के कारण बंद पड़े हैं. हनुमानधारा मार्ग का पुल बह जाने तथा अन्य महत्वपूर्ण पुलियों के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है. सीमावर्ती क्षेत्रों में मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश का पारस्परिक संपर्क मार्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
महामारी का खतरा एवं बचाव कार्य
जल भराव समाप्त होने के उपरांत अब संक्रामक बीमारियों के प्रसार की गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है. गलियों एवं आवासों में जमा गंदगी की सफाई तथा जल स्रोतों का शोधन करना अत्यंत अनिवार्य हो गया है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं पीएसी की कुल 15 आपदा प्रबंधन टीमें लगातार बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं. राहत कार्यों के साथ-साथ प्रशासन के सामने अब वास्तविक आर्थिक नुकसान का सटीक आंकलन कर जनजीवन को पुन: पटरी पर लाने की चुनौती है.
